दिल्ली: इस वक्त पूरे देश में मॉनसून का मिजाज कुछ ऐसा बना हुआ है कि किसी को भी मौसम विभाग की तरफ से आने वाली हर अपडेट पर नजर रखनी पड़ रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने अब एक ऐसा ताजा वेदर बुलेटिन जारी किया है, जो देश के 16 से ज्यादा राज्यों में रहने वालों की टेंशन बढ़ा सकता है। सीधा-सीधा समझ लीजिए, आसमान से मुसीबत बरसने वाली है!
आईएमडी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों के ठीक ऊपर एक 'कम दबाव का क्षेत्र' बना हुआ है। अब ये कम दबाव का क्षेत्र, किसी भी इलाके में भारी बारिश की वजह बन सकता है।
इसके असर से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत कुल 16 से भी ज्यादा राज्यों में अगले कुछ दिनों तक बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
तो आखिर क्यों हो रहा है ऐसा और कहां-कहां अलर्ट है?
मौसम विभाग ने 16 जुलाई तक के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए एक विस्तृत पूर्वानुमान और चेतावनी जारी की है। इसमें साफ-साफ बताया गया है कि उत्तर भारत, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर भारत में तो मूसलाधार बारिश का दौर यूं ही जारी रहेगा, लेकिन अगले 6-7 दिनों में मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश थोड़ी थम सकती है, या कहें तो उसमें कमी देखने को मिल सकती है।
मतलब, कुछ जगह पानी-पानी और कुछ जगह राहत की सांस। लेकिन वो राहत भी कब तक, कहना मुश्किल है क्योंकि मॉनसून का खेल बड़ा अप्रत्याशित होता है।
आईएमडी ने लोगों को सावधानी बरतने और घर से तभी निकलने की सलाह दी है जब बेहद जरूरी हो।
पिछले 24 घंटों में आसमान ने क्या-क्या दिखाया?
अगर बीते 24 घंटों की बात करें, जो कि 10 जुलाई की सुबह 08:30 बजे खत्म हुए हैं, तो देश के कई इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश और आंधी-तूफान ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। आंकड़ों पर गौर करें तो आपको स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लग जाएगा।
सबसे पहले बात 'एक्सट्रीम भारी बारिश' की। ये वो कैटेगरी है जहां 221 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की गई।
उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में ऐसी भीषण बारिश ने हाहाकार मचाया है। समझ लीजिए, नदियों में उफान और पहाड़ों पर लैंडस्लाइड का खतरा बना हुआ है।
इसके बाद आती है 'बहुत भारी बारिश' की कैटेगरी, जहां 12 से 20 सेंटीमीटर तक पानी बरसा। पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में इस तरह की बारिश दर्ज की गई है।
यहां भी जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
'भारी बारिश' ने भी अपनी दस्तक दी, जिसकी मात्रा 7 से 11 सेंटीमीटर तक रही। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, त्रिपुरा और गंगा तटीय पश्चिम बंगाल में भी आसमान से खूब पानी गिरा है।
दिल्ली-एनसीआर में तो सड़कें तालाब बनी हुई दिख रही थीं।
सिर्फ बारिश ही नहीं, आंधी-तूफान और तेज हवाओं ने भी खूब जोर दिखाया। पूर्वी मध्य प्रदेश में 60-80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।
वहीं अंडमान-निकोबार, ओडिशा, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी, राजस्थान, पश्चिमी एमपी, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात, कच्छ, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, रायलसीमा, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक में भी 40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं ने परेशान किया।
16 जुलाई तक देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसा रहेगा मौसम?
चलिए, अब सीधे मुद्दे पर आते हैं कि आने वाले दिनों में क्या उम्मीद की जा सकती है। मौसम विभाग ने 16 जुलाई तक के लिए जो बुलेटिन जारी किया है, उसके मुताबिक उत्तर-पश्चिमी भारत में स्थिति कुछ यूं रहेगी:
आज, यानी 10 जुलाई को दिल्ली-एनसीआर (जिसमें हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली आते हैं), हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। ये साफ चेतावनी है कि इन इलाकों में अगले कुछ घंटे बेहद भारी पड़ सकते हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए भी अच्छी खबर नहीं है। यहां 10 और 11 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मतलब, किसानों से लेकर आम जनता तक, सबको अलर्ट रहना होगा।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में तो यह बारिश रुकने का नाम ही नहीं लेगी, ऐसा लग रहा है। 10 से 16 जुलाई तक इन पहाड़ी राज्यों में व्यापक से बहुत व्यापक बारिश जारी रहने का अनुमान है।
पहाड़ों पर इस तरह की लगातार बारिश से भूस्खलन और नदियों का जलस्तर बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है, सो लोगों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। कुल मिलाकर, उत्तर भारत के कई हिस्सों में अभी भी आसमान से आफत बरसती रहेगी।
यह मौसम विभाग की तरफ से जारी की गई ताजातरीन जानकारी है। अगले कुछ दिनों तक जब तक मौसम विभाग कोई नया अपडेट नहीं देता, तब तक इन इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्कता बरतनी होगी।
खास तौर पर उन इलाकों में जहां पहले ही जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन चुकी है।






































