मुंबई: गेमिंग की दुनिया में इन दिनों एक खबर ने भूचाल ला दिया है। जो गेमर्स फिजिकल डिस्क खरीदकर अपना कलेक्शन बनाना पसंद करते हैं, उनके लिए ये खबर किसी झटके से कम नहीं है। जानी-मानी गेमिंग कंपनी सोनी ने ऐलान किया है कि वो साल 2028 से अपने प्लेस्टेशन गेम्स के फिजिकल डिस्क का प्रोडक्शन बंद कर देगी। इसका मतलब सीधा है – गेम खरीदने के लिए आपको सिर्फ डिजिटल स्टोर का रुख करना पड़ेगा।
अब आप सोच रहे होंगे कि ये अचानक से क्या हो गया? क्या गेमर्स की 'कलेक्शन' वाली आदत पर ब्रेक लगने वाला है? कई लोग इसे बड़ा शॉक मान रहे हैं, लेकिन एक एनालिस्ट साहब का कहना है कि ये तो होना ही था। दरअसल, आज के दौर में डिजिटल बिक्री जिस तेजी से बढ़ी है, उसे देखते हुए ये कदम उठना तय था।
यह खबर उन लोगों के लिए खास तौर पर चिंताजनक है, जिन्हें अपनी गेम लाइब्रेरी में फिजिकल डिस्क का एहसास पसंद है, जो अपने फेवरेट गेम की खूबसूरत केसिंग को निहारते हैं। लेकिन सोनी के इस कदम ने उन्हें सीधे-सीधे डिजिटल भविष्य की तरफ धकेल दिया है, जहां सब कुछ क्लाउड और डाउनलोड्स पर आधारित होगा।
आखिर सोनी ने ये बड़ा फैसला क्यों लिया?
इस पूरे मामले पर निको पार्टनर्स (Niko Partners) के डेनियल अहमद ने अपनी राय रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी बात रखते हुए इस फैसले की तुलना एप्पल के पुराने लैपटॉप्स से सीडी ड्राइव हटाने से की।
अहमद का कहना था, “ये कुछ वैसा ही है, जैसे एप्पल ने 2008 से अपने लैपटॉप्स से सीडी ड्राइव हटाना शुरू किया था।”
वो याद दिलाते हैं कि उस वक्त भी बहुत शिकायतें हुई थीं, लेकिन आज कोई इस बात की शिकायत नहीं करता। 2010 के शुरुआती सालों में भी कम ही लोग इसकी परवाह करते थे।
अहमद के मुताबिक, सोनी का ये फैसला इसलिए आया क्योंकि प्लेस्टेशन के डिजिटल गेम्स की परफॉर्मेंस अब पहले से कहीं बेहतर हो गई है, खासकर PS4 के लॉन्च के बाद से।
उन्होंने साफ तौर पर कहा, “सोनी के इस फैसले के बारे में सबसे पहली बात ये है कि कंसोल्स के लिए ये कभी न कभी तो होना ही था। अगर PS6 के साथ नहीं, तो PS7 के साथ ज़रूर होता।
” ये बताता है कि ये कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि बदलते मार्केट ट्रेंड्स का नतीजा है।
डिजिटल की तरफ क्यों भाग रहे हैं सब?
आंकड़े इस बदलाव की कहानी खुद बताते हैं। अहमद ने बताया कि PS4 आने से पहले प्लेस्टेशन पर फुल गेम की डिजिटल बिक्री 10% से भी कम थी, जो आज बढ़कर लगभग 80% हो गई है।
सोचिए, कितना बड़ा उछाल है ये!
एक्सबॉक्स की बात करें तो वहां तो ये आंकड़ा और भी ऊपर है, 90% से ज़्यादा। अहमद को तो इस बात पर हैरानी है कि एक्सबॉक्स ने ये कदम पहले क्यों नहीं उठाया।
बेशक, इन आंकड़ों में सिर्फ डिजिटल गेम्स शामिल हैं, जो आज के मार्केट की हकीकत दिखाते हैं। इसमें DLC (डाउनलोड करने योग्य कंटेंट), माइक्रो-ट्रांजेक्शन या सब्सक्रिप्शन/फ्री गेम्स शामिल नहीं हैं, लेकिन फिर भी ये ट्रेंड साफ है।
यहां गेमिंग कंपनियों का फोकस अब ‘क्लोज्ड इकोसिस्टम’ बनाने पर है, जहां वे अपनी शर्तों पर सबकुछ कंट्रोल कर सकें और ज्यादा प्रॉफिट मार्जिन कमा सकें। डिजिटल सेल्स में कोई फिजिकल इन्वेंटरी, डिस्ट्रीब्यूशन या रिटेल मार्जिन का खर्च नहीं होता, जिससे कंपनियों को सीधा फायदा होता है।
गेमर्स के लिए इसका क्या मतलब है?
सोनी के इस फैसले से गेमिंग कम्युनिटी में एक बहस छिड़ गई है। कई गेमर्स इससे खुश नहीं हैं।
कुछ ने तो PS Plus सब्सक्रिप्शन तक कैंसिल करने की बात कही है। उनकी चिंता वाजिब भी है – गेम की ओनरशिप को लेकर।
जब गेम सिर्फ डिजिटल होंगे, तो सवाल उठता है कि क्या वे सचमुच आपके हैं? अगर कोई सर्विस बंद हो जाए, तो क्या होगा?
डेनियल अहमद ने अपने दावों को सपोर्ट करने के लिए कुछ और डेटा शेयर किया। उन्होंने बताया कि लगभग 50% PS5 यूज़र्स PS Plus के सब्सक्राइबर हैं।
इन लोगों ने बड़ी डिजिटल लाइब्रेरी बना रखी है या उनके पास कई डिजिटल गेम्स का एक्सेस है। इसका मतलब है कि आधे से ज़्यादा PS5 यूज़र्स पहले से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काफी निर्भर हैं।
अहमद कहते हैं, “सच तो ये है कि कंसोल इकोसिस्टम इस समय लगभग पूरी तरह से डिजिटल हो चुका है।” ये बात फिजिकल डिस्क के चाहने वालों को शायद पसंद न आए, लेकिन ये गेमिंग इंडस्ट्री की नई सच्चाई है।
क्या सोनी अपना फैसला बदलेगी?
इस बीच, प्लेस्टेशन के पूर्व बॉस ने भी सोनी के फिजिकल डिस्क प्रोडक्शन बंद करने की योजना को 'काफी नाटकीय' बताया है। उन्होंने वो समय याद किया जब 'डिजिटल बिक्री शून्य प्रतिशत थी क्योंकि हमारे पास डिजिटल मार्केट नहीं था।
' ये बताता है कि यह कितना बड़ा बदलाव है।
एनालिस्ट का साफ कहना है कि 'डिजिटल सोनी के लिए बहुत आकर्षक है' और प्लेस्टेशन अपना फैसला नहीं बदलेगा, भले ही फैंस PS Plus सब्सक्रिप्शन कैंसिल करने की धमकी क्यों न दें। कुल मिलाकर, फिजिकल डिस्क का युग अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।
2028 तक ये पूरी तरह खत्म हो जाएगा, और गेमिंग की दुनिया पूरी तरह से डिजिटल हो जाएगी। अब गेमर्स को इस नए डिजिटल युग में एडजस्ट करना होगा और अपनी पुरानी आदतों को बदलना होगा।
यह गेमिंग के भविष्य का एक बड़ा संकेत है।




































