राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र: दिल्ली से गाजियाबाद और मेरठ के बीच फर्राटा भर रही अपनी नमो भारत रैपिड रेल ने अब कमाल दिखाना शुरू कर दिया है। यात्री भैया, यहां सिर्फ ट्रेन नहीं, बल्कि एक पूरा अनुभव दौड़ रहा है, और अब तो इसकी डिमांड इतनी बढ़ गई है कि चलाने वाले भी हैरान हैं। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन यानी NCRTC के कर्ता-धर्ता अब यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य के लिए एक जबरदस्त "मेगा प्लान" तैयार कर चुके हैं। ये प्लान ऐसा है, जो आपके लिए ट्रेन पकड़ना और भी आसान बना देगा!
बता दें कि अभी इस कॉरिडोर पर हर रोज करीब 1 लाख लोग सफर कर रहे हैं। ये आंकड़ा कोई छोटा-मोटा नहीं, बल्कि नमो भारत की बढ़ती लोकप्रियता का सीधा सबूत है।
NCRTC के एमडी शलभ गोयल ने हाल ही में पीटीआई को दिए एक खास इंटरव्यू में इन सभी बातों का खुलासा किया है। उनकी बातों से साफ है कि नमो भारत सिर्फ एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि भविष्य की यात्रा का एक नया तरीका बन रही है।
तो क्या अब हर 3 मिनट में मिलेगी नमो भारत ट्रेन?
गोयल साहब ने बताया कि इस वक्त नमो भारत ट्रेनें करीब 10 मिनट के गैप में चल रही हैं। ये मौजूदा यात्रियों के लिए तो काफी आरामदायक है, लेकिन अगर मांग बढ़ती है, तो NCRTC के पास एक बड़ा मास्टरप्लान है।
उन्होंने साफ कहा कि यात्रियों की डिमांड और जरूरत के हिसाब से इस "फ्रीक्वेंसी" को घटाकर सिर्फ 3 मिनट किया जा सकता है। आप सोचिए, हर तीन मिनट पर एक ट्रेन! ये तो भैया, मेट्रो को भी टक्कर देने वाली बात है।
उनका कहना है कि पूरे "कॉरिडोर" को इस तरह से "डिजाइन" किया गया है कि इसमें भविष्य की जरूरतों के मुताबिक क्षमता बढ़ाने की पूरी गुंजाइश है। मतलब, चाहे जितनी भीड़ बढ़े, "सिस्टम" उसे संभालने के लिए तैयार है।
NCRTC लगातार पूरे "कॉरिडोर" पर यात्रियों की मांग का आकलन करता रहता है और जरूरत के हिसाब से "ऑपरेशन" में बदलाव भी करता है। ये दिखाता है कि यात्रियों की सुविधा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
इसी का नतीजा है कि "कॉर्पोरेशन" ने हाल ही में "सराय काले खां" और "मेरठ साउथ" के बीच "पीक आवर्स" के दौरान 18 "एक्स्ट्रा ट्रिप्स" शुरू की हैं। इससे उन लोगों को काफी राहत मिली है जो ऑफिस जाने या घर लौटने के समय ट्रैवल करते हैं।
अब तक 3.5 करोड़ यात्रियों ने किया नमो भारत का सफर, और आंकड़ा बढ़ रहा है
NCRTC के एमडी ने बताया कि "नमो भारत नेटवर्क" पर "राइडरशिप" में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हर दिन करीब 1 लाख यात्री इस नेटवर्क पर "ट्रेवल" कर रहे हैं।
ये आंकड़ा बताता है कि लोगों को ये "रैपिड रेल" कितनी पसंद आ रही है। कुल मिलाकर, अब तक 3.5 करोड़ यात्री इस "कॉरिडोर" से सफर कर चुके हैं।
ये अपने आप में एक बड़ा "माइलस्टोन" है।
एक और खास बात ये है कि नमो भारत की 100 प्रतिशत "ट्रेनसेट" गुजरात के "सावली" में बनाई गई हैं। जी हां, ये पूरी तरह "मेक इन इंडिया" पहल का हिस्सा हैं।
इसका मतलब ये है कि हम अपनी ताकत से अपने देश के लिए बेहतरीन परिवहन "सिस्टम" बना रहे हैं, जो "क्वालिटी" और "स्पीड" दोनों में अव्वल है।
"ट्रेवलेटर" ने कैसे बढ़ाए यात्री?
NCRTC का एक बड़ा फोकस "नमो भारत" स्टेशनों को दूसरे पब्लिक "ट्रांसपोर्ट" के साधनों से "इंटीग्रेट" करने पर भी रहा है। मतलब, आप एक जगह से उतरकर आसानी से दूसरी जगह के लिए दूसरा साधन पकड़ सकें।
इसी कड़ी में, मई 2026 में "सराय काले खां नमो भारत स्टेशन" को "हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन" से जोड़ने वाला "ट्रेवलेटर" (मूविंग वॉकवे) से लैस "फुट ओवर ब्रिज" शुरू किया गया था।
क्या आप जानते हैं कि इसका क्या असर हुआ? इस "ट्रेवलेटर" के चालू होने से "सराय काले खां" स्टेशन पर यात्रियों की संख्या में करीब 30 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है! ये "इंटीग्रेशन" का सीधा फायदा है। इसी तरह, "न्यू अशोक नगर" और "गाजियाबाद नमो भारत" स्टेशनों को भी "फुट ओवर ब्रिज" के जरिए सीधे "मेट्रो स्टेशनों" से जोड़ा गया है।
"आनंद विहार रेलवे स्टेशन" और "आईएसबीटी" जैसे महत्वपूर्ण "ट्रांसपोर्ट हब" के साथ भी कनेक्टिविटी का काम तेजी से चल रहा है, ताकि यात्री बिना किसी "टेंशन" के एक से दूसरे "मोड" में स्विच कर सकें।







































