दरभंगा: बिहार के दरभंगा शहर में इन दिनों एक खबर खूब चर्चा में है, खासकर उन घरों में जहाँ शहनाइयाँ बजने का इंतज़ार हो रहा है। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ने अपना नया विश्वविद्यालय पंचांग 2026-27 जारी कर दिया है और इस बार इसने विवाह के इच्छुक जोड़ों को खूब खुश कर दिया है। पता है क्यों? क्योंकि इस पंचांग में अगले साल के लिए बंपर 63 शुभ विवाह मुहूर्त बताए गए हैं! सोचिए, 63 दिन! पिछले साल की तुलना में पूरे 18 दिन ज़्यादा। तो अगर आप भी घर में शादी-ब्याह की बातें चल रही थीं, तो समझ लीजिए, इस यूनिवर्सिटी ने आपके लिए अच्छे दिनों की सौगात भेज दी है।
मंगलवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में एक खास समारोह हुआ, जिसमें विद्वानों और शिक्षाविदों की भीड़ लगी थी। माहौल एक दम त्योहार जैसा था, क्योंकि सिर्फ शादी ही नहीं, दशहरा, दिवाली, छठ पूजा से लेकर गृह प्रवेश और मुंडन तक, सभी प्रमुख त्योहारों और मांगलिक कार्यों की तारीखें भी इसी पंचांग में घोषित की गई हैं।
इस पंचांग का विमोचन कुलपति प्रोफेसर. पांडेय ने किया, जिन्होंने साफ कहा कि ये सिर्फ शुभ मुहूर्त देखने का माध्यम नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी की पहचान और गौरव का प्रतीक भी है।
क्यों खास है दरभंगा विश्वविद्यालय का यह पंचांग?
दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय का पंचांग कोई मामूली चीज नहीं। यह सिर्फ एक कैलेंडर या तारीखों का हिसाब-किताब नहीं है, बल्कि मिथिलांचल और देश के कई हिस्सों के लिए एक भरोसेमंद ज्योतिषीय मार्गदर्शक है।
कुलपति प्रोफेसर. पांडेय ने विमोचन के मौके पर पंचांग बनाने वाले विद्वानों की खूब तारीफ की।
उन्होंने बताया कि इसे तैयार करने में कितनी मेहनत और गहन ज्योतिषीय अध्ययन लगा है। यह स्कंध ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों और मकरंद गणित पर आधारित है और इसमें तिथि और मुहूर्त का निर्धारण भी मैथिल धर्मशास्त्रों के हिसाब से होता है, यानी पूरी तरह से प्रामाणिक और विश्वसनीय।
इस बार के पंचांग की एक और दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2026-27 के लिए शनि को राजा और मंगल को मंत्री बताया गया है। ज्योतिष में ग्रहों की ऐसी स्थिति का भी अपना महत्व होता है, जो आने वाले साल के विभिन्न पहलुओं पर असर डालती है।
जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. निशिकांत ने बताया कि इस पंचांग को 30 जून, 2026 को विमोचित किया गया है और यह 30 जुलाई, 2026 से लेकर 18 जुलाई, 2027 तक के लिए प्रभावी रहेगा।
इसका मतलब है कि आने वाले पूरे एक साल से ज़्यादा समय के लिए सभी धार्मिक और मांगलिक कार्यों की रूपरेखा तैयार है।
इतिहास के पन्ने और पंचांग का सफर
इस पंचांग का इतिहास भी काफी समृद्ध है। कार्यक्रम में शोध एवं प्रकाशन प्रभारी प्रोफेसर.
दिलीप कुमार झा ने बताया कि इस विश्वविद्यालय पंचांग के जनक पूर्व कुलपति प्रोफेसर. रामकरण शर्मा थे।
उन्हीं के मार्गदर्शन और संरक्षण में साल 1977-78 में इसका पहला प्रकाशन हुआ था। सोचिए, करीब 50 साल पहले इसकी शुरुआत हुई और आज यह 49वां अंक है, जो लगातार प्रकाशित हो रहा है।
ये अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है कि एक शैक्षिक संस्थान इतने सालों से पारंपरिक ज्ञान को सहेज कर रख रहा है और उसे जन-जन तक पहुंचा रहा है।
यह दिखाता है कि कैसे दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय न सिर्फ संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि भारतीय संस्कृति और ज्योतिषीय परंपराओं को भी जीवित रखे हुए है। हर साल हजारों परिवार, पुरोहित और श्रद्धालु इस पंचांग का बेसब्री से इंतजार करते हैं, ताकि वे अपने घरों में होने वाले शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों की सही तारीखें तय कर सकें।
शहनाइयों के लिए बंपर साल: 63 शुभ विवाह मुहूर्त
अब बात करते हैं उस खास खबर की, जिसने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है – विवाह के शुभ मुहूर्त। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026-27 में कुल 63 दिन ऐसे हैं जब आप धूमधाम से शादी की शहनाइयां बजा सकते हैं।
ये विवाह मुहूर्त 22 नवंबर, 2026 से शुरू होकर 9 जुलाई, 2027 तक चलेंगे। जो लोग पिछले साल विवाह की योजना बना रहे थे, उन्हें शायद थोड़ी निराशा हुई होगी, क्योंकि तब सिर्फ 45 ही शुभ मुहूर्त थे।
लेकिन इस बार तो रिकॉर्ड तोड़ दिया गया है – पूरे 18 दिन ज़्यादा!
इतनी अधिक शुभ तिथियां मिलने से उम्मीद जताई जा रही है कि अगले साल विवाह समारोहों में जबरदस्त उछाल आएगा। पंडितों और मैरिज हॉल वालों के पास बुकिंग की लाइन लग सकती है।
यह उन परिवारों के लिए बड़ी राहत की बात है जिन्हें शुभ दिनों की कमी के कारण शादी की तारीखें आगे-पीछे करनी पड़ती थीं। अब उन्हें अपनी पसंद की तारीख चुनने के लिए काफी विकल्प मिलेंगे।
सिर्फ शादी नहीं; मुंडन, गृह प्रवेश के लिए भी शुभ दिन
पंचांग सिर्फ शादी-ब्याह तक ही सीमित नहीं है। इसमें अन्य सभी महत्वपूर्ण धार्मिक और पारिवारिक संस्कारों के लिए भी शुभ तिथियां निर्धारित की गई हैं।
यह उन परिवारों के लिए बहुत उपयोगी है जो अपने बच्चों के मुंडन संस्कार, उपनयन संस्कार या नए घर में प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्य करना चाहते हैं।
- द्विरागमन: नवविवाहिता को मायके से ससुराल दोबारा लाने के लिए 27 शुभ दिन।
- मुंडन संस्कार: बच्चों के मुंडन के लिए 22 शुभ दिन।
- उपनयन (जनेऊ संस्कार): ब्राह्मणों और अन्य वर्णों में उपनयन के लिए 14 शुभ दिन।
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश के लिए 18 शुभ दिन।
- गृहारंभ: नया घर बनाने की शुरुआत के लिए 19 शुभ दिन।
- देवादि प्रतिष्ठा: मंदिरों में मूर्ति स्थापना या अन्य धार्मिक प्रतिष्ठाओं के लिए 18 शुभ दिन।
इन सभी तिथियों की घोषणा से परिवारों को अपने शुभ कार्यों की योजना बनाने में काफी आसानी होगी। वे बिना किसी संशय के सही समय पर अपने संस्कारों को पूरा कर सकेंगे।
प्रमुख पर्व-त्योहारों की तिथियां भी तय
मांगलिक कार्यों के साथ-साथ, पंचांग में वर्ष 2026-27 के लिए प्रमुख पर्व-त्योहारों की तिथियां भी घोषित की गई हैं। यह उन लोगों के लिए खास है जो अपने अवकाश और यात्रा की योजना पहले से बनाना चाहते हैं।
- दुर्गा पूजा (अष्टमी-नवमी): 15-16 अक्टूबर, 2026
- दिवाली: 5 नवंबर, 2026
- छठ पूजा: 8-9 नवंबर, 2026
- मकर संक्रांति: 14 जनवरी, 2027
- महा शिवरात्रि: 16 फरवरी, 2027
- होली: 21-22 मार्च, 2027
- राम नवमी: 27 मार्च, 2027
- रक्षा बंधन: 16 अगस्त, 2027
ये तारीखें सिर्फ त्योहार मनाने के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक मिलन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। पंचांग के माध्यम से इनकी जानकारी पहले से मिल जाने से लोग अपनी तैयारियों को और बेहतर ढंग से अंजाम दे पाते हैं।
सिमरिया कल्पवास से सौराठ सभा तक, सब कुछ साफ
मिथिलांचल की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में कुछ खास आयोजनों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। डॉ.
निशिकांत ने इन विशेष आयोजनों की तिथियां भी स्पष्ट की हैं:
- सिमरिया कल्पवास: यह एक पवित्र धार्मिक आयोजन है, जो 18 अक्टूबर से 17 नवंबर, 2026 तक चलेगा।
- प्रयाग कल्पवास: यह 15 जनवरी से 13 फरवरी, 2027 तक आयोजित होगा।
- मिथिलांचल की प्रसिद्ध सौराठ सभा: यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सभा 1 जुलाई से 9 जुलाई, 2027 तक चलेगी। सौराठ सभा एक ऐसी परंपरा है जहां विवाह के लिए योग्य वर-वधु के संबंध तय किए जाते हैं, खासकर मैथिल ब्राह्मणों में।
इन घोषणाओं के साथ ही मिथिलांचल समेत देश के अन्य हिस्सों के श्रद्धालुओं, पुरोहितों और आम परिवारों को आगामी वर्ष के लिए सभी मांगलिक कार्यों, व्रत-त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों की आधिकारिक जानकारी मिल गई है। अब लोग पूरी तैयारी के साथ अपने पर्व-त्योहार और शुभ कार्य कर सकते हैं।
यह पंचांग एक बार फिर से पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सुविधा के बीच एक पुल का काम कर रहा है, जिससे हमारी विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहे।


