ऊना: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में आज सुबह सूरज तो निकला, लेकिन मलांगड़ मियां गांव के लिए ये किसी काली रात से कम नहीं था। देश की सेवा में अपनी जान न्योछावर करने वाले हवलदार विशम्बर सिंह का पार्थिव शरीर जब उनके घर पहुंचा, तो ऐसा लगा मानो पूरे गांव पर सन्नाटा छा गया हो। माहौल इतना गमगीन था कि हर आंख नम थी, और हर दिल में बस एक ही आवाज़ गूंज रही थी – ‘विशम्बर सिंह अमर रहें’ और ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, विशम्बर तेरा नाम रहेगा’
सुबह करीब 8:30 बजे जैसे ही सेना के जवान तिरंगे में लिपटे विशम्बर के ताबूत को लेकर घर पहुंचे, उनकी माता शीला देवी और पत्नी सोनिया देवी ताबूत से लिपटकर जोर-जोर से रोने लगीं। उनका विलाप सुनकर वहां मौजूद हर किसी का कलेजा फट गया।
दोनों महिलाएं बार-बार बेसुध हो रही थीं, जिन्हें संभालने में परिवार वालों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। विशम्बर सिंह अपने पीछे दो छोटे बेटों को छोड़ गए हैं, जिनमें से एक छह महीने का है और दूसरा 11 साल का।
सबसे हृदय विदारक दृश्य तब था जब 11 साल के छोटे अक्षित ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस छोटे से कंधे पर इतना बड़ा भार देखकर सबकी आंखें नम हो गईं।
हवलदार विशम्बर सिंह का सैन्य सफ़र
हवलदार विशम्बर सिंह ने देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया था। जुलाई 2008 में उन्होंने भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में कदम रखा था।
लगभग 18 साल तक उन्होंने भारतीय सेना का गौरव बढ़ाया और देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी सेवाएं दीं। सेना में शामिल होने के कुछ सालों बाद उनका विवाह सोनिया देवी से हुआ।
उनका बड़ा बेटा केंद्रीय विद्यालय बंगाणा में छठी कक्षा में पढ़ाई कर रहा है, जबकि छोटा बेटा अभी महज छह महीने का है। परिवार और गांव वालों को विशम्बर पर बेहद गर्व था, क्योंकि उन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया था।
यह संयोग ही था कि देशभक्ति का जज्बा विशम्बर के परिवार में पहले से ही था। उनके पिता रसीला राम भी जैक राइफल रेजिमेंट में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
वर्तमान में वह चंडीगढ़ में कार्यरत हैं। पिता रसीला राम को सोमवार शाम को ही चंडीगढ़ अपनी ड्यूटी पर लौटना था, लेकिन सुबह-सुबह ही उन्हें देहरादून से अपने बड़े बेटे विशम्बर सिंह के निधन की मनहूस खबर मिली।
इस खबर ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। एक फौजी पिता के लिए अपने फौजी बेटे को खोना किसी पहाड़ टूटने से कम नहीं था।
परिवार पर दूसरा बड़ा आघात
विशम्बर सिंह का निधन परिवार के लिए एक बहुत बड़ा सदमा है, खासकर इसलिए क्योंकि पांच साल पहले भी इस परिवार ने एक और जवान बेटे को खो दिया था। विशम्बर के छोटे भाई जसविंदर सिंह भी सेना में ही थे और उनका भी असामयिक निधन हो गया था।
इस दोहरी त्रासदी ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया है। विशम्बर सिंह करीब डेढ़ महीने पहले ही छुट्टी बिताकर अपने गांव मलांगड़ मियां से देहरादून में अपनी ड्यूटी पर लौटे थे।
रविवार शाम को उन्होंने अपने पिता रसीला राम और पत्नी सोनिया देवी से फोन पर आखिरी बार बात की थी। उस वक्त उन्होंने सब ठीक होने की बात कही थी।
किसे पता था कि यह उनकी आखिरी बात होगी, और अगले ही दिन यह दुखद खबर आ जाएगी।
सोमवार को विशम्बर सिंह अपनी यूनिट में पीटी (फिजिकल ट्रेनिंग) में शामिल हुए थे। पीटी पूरी करने के बाद जब वह साइकिल से अपनी यूनिट लौट रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।
साथी जवानों ने बिना कोई देरी किए उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बताया जा रहा है कि उनकी मृत्यु हार्ट अटैक के कारण हुई। सेना के अधिकारियों ने परिवार को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई
मंगलवार को जब विशम्बर सिंह की अंतिम यात्रा उनके घर से निकली, तो पूरा मलांगड़ मियां गांव और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़े। ‘विशम्बर सिंह अमर रहे’ और ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, विशम्बर तेरा नाम रहेगा’ जैसे नारे गूंज रहे थे, जो उनके देश प्रेम और बलिदान को सलाम कर रहे थे।
राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
प्रशासन और सेना के कई बड़े अधिकारी भी इस दुखद घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहे और हवलदार विशम्बर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। इनमें एसडीएम बंगाणा सोनू गोयल, डीएसपी हेडक्वार्टर अजय ठाकुर, देहरादून से आए सैन्य अधिकारी, पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर, लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र पटियाल और लेफ्टिनेंट कर्नल केसी शर्मा प्रमुख थे।
इन सभी ने शहीद जवान को पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें अंतिम सलामी दी। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी हवलदार विशम्बर सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं।
उनका कहना था कि विशम्बर सिंह का बलिदान देश कभी नहीं भुला पाएगा। इस दुख की घड़ी में पूरा प्रदेश उनके परिवार के साथ खड़ा है।



































