मुंबई: भारतीय शेयर बाजार, जो बीते कुछ समय से अपनी चाल पर संभल-संभल कर चल रहा है, अब एक नए मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। अगर आप भी बाजार की ऊँच-नीच से परेशान हैं या निवेश करने से पहले सौ बार सोचते हैं, तो यह खबर आपके लिए राहत भरी हो सकती है। दिग्गज ब्रोकरेज फर्मों ने अब संकेत देना शुरू कर दिया है कि बाजार में जल्द ही एक नई तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों की धड़कनें बढ़ाने वाला यह माहौल क्या वाकई बदलने वाला है? आइए समझते हैं।
हाल के दिनों में बाजार ने जो गोते लगाए हैं, उसने कई निवेशकों को मायूस किया है। लेकिन अब मॉर्गन स्टेनली जैसी ग्लोबल फाइनेंशियल पावरहाउस की तरफ से अच्छी खबर आई है।
मॉर्गन स्टेनली ने साफ-साफ कहा है कि भारतीय बाजार में जो गिरावट आई है, वो कोई ढाँचागत (स्ट्रक्चरल) समस्या नहीं, बल्कि चक्रीय (साइक्लिकल) है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये 'साइक्लिकल' और 'स्ट्रक्चरल' बलाएं क्या हैं और इनका मतलब क्या है?
बाजार की गिरावट 'चक्रीय' क्यों है, ढाँचागत क्यों नहीं?
देखिये, जब हम 'ढाँचागत गिरावट' की बात करते हैं, तो इसका मतलब होता है कि अर्थव्यवस्था या बाजार के बुनियादी सिद्धांतों में कोई बड़ी और लंबी अवधि की खराबी आ गई है। जैसे कि, अगर देश की आर्थिक नीतियां खराब हो जाएं, कंपनियों का फंडामेंटल कमजोर हो जाए, या कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकट आ जाए, तो वो ढाँचागत समस्या मानी जाती है।
ऐसी समस्याओं से उबरने में बहुत समय लगता है और इसका असर बाजार पर भी लंबे समय तक रहता है।
लेकिन, 'चक्रीय गिरावट' का मतलब थोड़ा अलग होता है। ये वो गिरावट होती है जो सामान्य आर्थिक चक्र का हिस्सा होती है।
जैसे कि, कभी महंगाई बढ़ गई, ब्याज दरें ऊपर चली गईं, या ग्लोबल ग्रोथ में थोड़ी सुस्ती आ गई, तो इसका असर कंपनियों की कमाई पर दिखता है और बाजार में एक करेक्शन आ जाता है। ये उतार-चढ़ाव अस्थायी होते हैं, और जैसे ही आर्थिक चक्र दोबारा मजबूत होता है, बाजार फिर से रफ्तार पकड़ लेता है।
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि भारत में अभी यही 'चक्रीय' उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
तो इसका सीधा सा मतलब ये हुआ कि भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत है। जो गिरावट दिख रही है, वो बाजार की स्वाभाविक चाल का एक हिस्सा है, न कि कोई ऐसी गंभीर बीमारी जो ठीक होने में सालों लगा दे।
यह निवेशकों के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है, क्योंकि इससे पता चलता है कि बाजार में रिकवरी की संभावना प्रबल है।
क्या मीडियम टर्म में बाजार का भविष्य उज्ज्वल है?
मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार की मीडियम टर्म (मध्यम अवधि) की संभावनाओं पर इस गिरावट का कोई असर नहीं पड़ा है। यानी, अगर आप अगले कुछ महीनों या एक-दो साल के नजरिए से बाजार को देखते हैं, तो यहाँ ग्रोथ की पूरी उम्मीद है।
वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भारत एक मजबूत ग्रोथ स्टोरी पर है, जिसकी बुनियाद काफी ठोस है। चाहे वो डिजिटल क्रांति हो, बढ़ता हुआ उपभोग हो, या सरकार की तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी-भरकम खर्च हों, ये सभी फैक्टर्स भारतीय बाजार को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगे।
इसके अलावा, दुनिया भर में भले ही आर्थिक चुनौतियाँ हों, लेकिन भारत की अपनी घरेलू मांग काफी मजबूत बनी हुई है। यह वो कवच है जो हमें ग्लोबल झटकों से बचाता है।
कंपनियों की बैलेंस शीट सुधर रही है, और भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर धीरे-धीरे अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहा है। ऐसे में मॉर्गन स्टेनली का यह भरोसा हमें एक पॉजिटिव सिग्नल देता है।
सिर्फ मॉर्गन स्टेनली ही नहीं, और कौन-कौन है इस दौड़ में?
आपको बता दें कि सिर्फ मॉर्गन स्टेनली ही नहीं, बल्कि कई दूसरी नामी-गिरामी ब्रोकरेज फर्म भी भारतीय बाजार को लेकर काफी पॉजिटिव नजरिया रखती हैं। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर सभी फर्मों के नाम का जिक्र नहीं किया है, लेकिन टाइटल से साफ है कि यह एक बड़ा अनुमान है।
ये ब्रोकरेज फर्म, जो अक्सर बाजार के ट्रेंड्स को गहराई से एनालाइज करती हैं, अब निवेशकों को भरोसा दिला रही हैं कि यह 'खरीदने का मौका' हो सकता है।
इन फर्मों का मानना है कि जो निवेशक गिरावट के दौरान अच्छे और मजबूत शेयरों में निवेश कर धैर्य रखेंगे, उन्हें मीडियम से लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न मिल सकता है। ये एक आम बाजार की कहावत है कि 'बाजार में गिरावट ही निवेश का सबसे अच्छा मौका होती है', बस शर्त यह है कि आपकी रिसर्च और कंपनी चुनने का नजरिया सही हो।
गोल्ड कंपनियों के शेयरों में क्यों उछाल आया?
इसी बीच, बाजार से जुड़ी एक और दिलचस्प खबर सामने आई है। जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के बाद गोल्ड कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल देखने को मिला है।
अब सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों हुआ? आमतौर पर, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल होता है या महंगाई बढ़ने की आशंका होती है, तो निवेशक सोने को एक सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के तौर पर देखते हैं।
हो सकता है कि जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट ने सोने की कीमतों में आगे तेजी की भविष्यवाणी की हो, या फिर उसने सीधे तौर पर कुछ गोल्ड माइनिंग या गोल्ड फाइनेंस कंपनियों के शेयरों को खरीदने की सलाह दी हो। जब सोने की कीमतें बढ़ती हैं, तो सोने से जुड़ी कंपनियों को सीधे फायदा होता है, क्योंकि उनका मार्जिन बढ़ता है और उनकी कमाई में इजाफा होता है।
इससे उनके शेयरों की डिमांड बढ़ जाती है और उनमें उछाल आता है। यह दर्शाता है कि बाजार में एक तरफ जहां व्यापक रिकवरी की उम्मीद है, वहीं कुछ सेक्टर खास रिपोर्ट्स या ग्लोबल ट्रेंड्स की वजह से भी गुलजार हो रहे हैं।
कुल मिलाकर, शेयर बाजार में एक बार फिर से जोश लौटने की उम्मीद जग रही है। मॉर्गन स्टेनली का विश्लेषण कि यह गिरावट 'चक्रीय' है न कि 'ढाँचागत', निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत है।
साथ ही, दूसरी ब्रोकरेज फर्मों का भी पॉजिटिव आउटलुक और जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के बाद गोल्ड शेयरों में तेजी, ये सभी संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में भारतीय बाजार एक नई करवट ले सकता है। देखना होगा कि ये अनुमान कितनी तेजी से हकीकत में बदलते हैं और निवेशक इसका कितना फायदा उठा पाते हैं।




































