देशभर: दोस्तों, ये खबर सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य का वो रास्ता है, जिस पर चलकर वो कल की दुनिया के लिए तैयार होंगे। सोचिए जरा, आप 8वीं या 12वीं में पढ़ रहे हों और सीबीएसई जैसा बड़ा बोर्ड आपको आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पाइथन जैसी धांसू टेक्नोलॉजी बिल्कुल मुफ्त में सिखाए तो कैसा लगेगा? सुनकर ही एक्साइटमेंट बढ़ गई न? बस यही कमाल हुआ है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे देश के लाखों स्टूडेंट्स को डिजिटल दुनिया में एंट्री मारने का वो गोल्डन टिकट मिल गया है, जिसका सपना कई देखते हैं।
आज के दौर में जहां हर जगह टेक्नोलॉजी का बोलबाला है, ऐसे में स्कूली बच्चों के लिए ये मौका किसी जैकपॉट से कम नहीं है। अब 8वीं से 12वीं तक के छात्र घर बैठे ही मॉडर्न टेक्नोलॉजी के गुरु बन सकते हैं, वो भी बिना एक रुपया खर्च किए।
ये पहल सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी का एक मजबूत पुल है।
तो आखिर ये पूरा माजरा है क्या, कौन सिखा रहा है?
CBSE ने ये कमाल अकेले नहीं किया है। इसमें उनका साथ दिया है राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) ने।
जी हां, दोनों मिलकर कुल 19 जबरदस्त ऑनलाइन कोर्स लेकर आए हैं। ये कोर्स ऐसे-वैसे नहीं हैं, बल्कि आज की तारीख में इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा डिमांड वाली स्किल्स इनमें शामिल हैं।
अब चाहे आप टेक वर्ल्ड में घुसना चाहते हों या सिर्फ अपनी जानकारी बढ़ाना, ये कोर्स आपके बड़े काम आने वाले हैं।
जरा सब्जेक्ट्स की लिस्ट सुनिए, आपको भी लगेगा कि क्या गजब का कलेक्शन है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है, जो आजकल हर जगह छाया हुआ है।
फिर पाइथन प्रोग्रामिंग है, जिसकी मदद से बड़े-बड़े सॉफ्टवेयर बनते हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) भी है, जिससे पता चलता है कि हमारी रोजमर्रा की चीजें कैसे स्मार्ट बन रही हैं।
इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी, जेनरेटिव AI, AWS DevSecOps, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और VLSI डिजाइन जैसे सब्जेक्ट्स भी हैं। ये वो सब चीजें हैं, जिनके लिए लोग लाखों रुपये फीस देते हैं, लेकिन CBSE आपको ये सब मुफ्त में दे रहा है।
है ना कमाल की बात!
ये कोर्स किस भाषा में होंगे और इनकी अवधि क्या है?
CBSE ने इस बात का भी पूरा ख्याल रखा है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे इसका फायदा उठा सकें। इसलिए, इनमें से कई कोर्स इंग्लिश के साथ-साथ हमारी प्यारी हिंदी भाषा में भी उपलब्ध हैं।
इसका मतलब ये कि भाषा कोई बैरियर नहीं बनेगी। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से भाषा चुनकर पढ़ाई कर सकते हैं।
कोर्स की अवधि भी काफी फ्लेक्सिबल रखी गई है। ऐसा नहीं है कि आपको एक साथ घंटों कंप्यूटर के सामने बैठना पड़ेगा।
कुछ शुरुआती मॉड्यूल तो ऐसे हैं, जिन्हें आप सिर्फ 90 मिनट में निपटा सकते हैं। वहीं, अगर आप थोड़े एडवांस्ड लेवल के प्रोग्राम में कूदना चाहते हैं, तो कुछ कोर्स 100 घंटे से भी ज्यादा के हो सकते हैं।
इसका फायदा ये है कि छात्र अपनी मर्जी, अपने सीखने के लक्ष्य और अपने पास उपलब्ध समय के हिसाब से कोई भी कोर्स चुन सकते हैं। स्कूल की पढ़ाई के साथ इन्हें मैनेज करना कोई बड़ी टेंशन नहीं होगा।
छात्रों को इससे क्या धांसू फायदा मिलने वाला है?
ये पहल सिर्फ ऑनलाइन कोर्स नहीं है, ये एक तरह से छात्रों के लिए करियर का रास्ता खोलने वाली कुंजी है। सोचिए, स्कूल में रहते हुए ही आपको ऐसी टेक्नोलॉजी सीखने को मिल रही है, जो आमतौर पर कॉलेज या प्रोफेशनल ट्रेनिंग में सिखाई जाती है।
इससे क्या होगा? सबसे पहली बात, छात्रों को बिना किसी खर्चे के मॉडर्न टेक्नोलॉजी की गहरी समझ मिल जाएगी। दूसरी बात, वो अपनी स्पीड से कभी भी, कहीं भी ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं।
इसका मतलब है कि अपनी स्कूल की रेगुलर पढ़ाई के साथ-साथ वो इन स्किल्स को भी डेवलप कर पाएंगे। कोई छुट्टी नहीं लेनी, कोई क्लास नहीं छोड़नी!
CBSE ने इस प्रोग्राम को बढ़ावा देने के लिए अपने सभी एफिलिएटेड स्कूलों को भी निर्देश दिया है कि वो ज्यादा से ज्यादा छात्रों को इसमें शामिल करें। मतलब साफ है, बोर्ड चाहता है कि देश का हर बच्चा डिजिटल लिटरेसी में आगे बढ़े।
ये छात्रों की प्रैक्टिकल प्रॉब्लम-सॉल्विंग एबिलिटी, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और इनोवेशन स्किल को निखारने में मदद करेगा। साथ ही, हायर एजुकेशन और इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, डेटा एनालिटिक्स जैसे डिजिटल डोमेन में करियर बनाने के लिए उनकी नींव मजबूत करेगा।
शिक्षा विशेषज्ञ भी इस पहल की खूब तारीफ कर रहे हैं। उनका मानना है कि इंडस्ट्री से जुड़ी टेक्नोलॉजी से कम उम्र में ही परिचित होने से बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ता है और उन्हें भविष्य के लिए तैयार होने में मदद मिलती है।
ये सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि ऐसी प्रैक्टिकल नॉलेज है, जिसकी जरूरत आज की दुनिया को है।
और रजिस्ट्रेशन कैसे करें, क्या कोई फीस भी है?
ये सबसे अच्छी बात है। इन कोर्सेस के लिए कोई रजिस्ट्रेशन फीस नहीं है, कोई कोर्स फीस नहीं है।
बिल्कुल जीरो कॉस्ट। छात्रों को बस इतना करना है कि वो सीधे NIELIT डिजिटल यूनिवर्सिटी पोर्टल पर जाएं और अपनी पसंद के कोर्स के लिए रजिस्टर कर लें।
कोई लंबी-चौड़ी प्रक्रिया नहीं, कोई झंझट नहीं। सीधा पोर्टल पर जाओ, अपनी पसंद का कोर्स चुनो और अपनी डिजिटल लर्निंग जर्नी शुरू कर दो।
कुल मिलाकर, सीबीएसई की ये पहल स्कूली शिक्षा को भारत की बढ़ती टेक्नोलॉजी और डिजिटल इकॉनमी की जरूरतों के साथ जोड़ने का एक बहुत बड़ा और शानदार कदम है। इससे हमारे बच्चे सिर्फ किताबें नहीं पढ़ेंगे, बल्कि भविष्य के लिए खुद को पूरी तरह से स्किल्ड और तैयार कर पाएंगे।
तो फिर देर किस बात की? जाइए और इस मौके का पूरा फायदा उठाइए!









































