नई दिल्ली: सोने की चमक, जो अक्सर लोगों को अपनी तरफ खींचती है, इस बार कुछ फीकी पड़ती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर अपने देश भारत तक, गोल्ड के रेट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मतलब, अगर आप ये सोचकर बैठे थे कि पीली धातु की रफ्तार थमेगी नहीं, तो शायद थोड़ी मायूसी हाथ लग सकती है।
मार्केट में पिछले कुछ दिनों से जो उठा-पटक चल रही है, उसका सीधा असर सोने के भाव पर पड़ा है। 10 जुलाई, 2026 की बात है, जब सोने के दाम धड़ाम से नीचे आ गिरे।
आलम ये रहा कि स्पॉट गोल्ड अंतरराष्ट्रीय बाजार में 0.1 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,115.79 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सोचिए, एक दिन में इतना नीचे! लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
अमेरिका में अगस्त डिलीवरी के लिए जो गोल्ड फ्यूचर्स ट्रेड होता है, वो भी 0.4 फीसदी गिरकर 4,124.90 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। और अगर इस पूरे हफ्ते का हिसाब लगाएं, तो गोल्ड में करीब 1.4 फीसदी की गिरावट दिख चुकी है।
मतलब, पिछले कुछ हफ्तों की तेजी को इस हफ्ते ने झटका दे दिया है।
भारत में सोने का क्या हाल रहा, और कीमतों में क्यों आई गिरावट?
भारत में भी तस्वीर कुछ खास अलग नहीं थी। अपने कमोडिटी एक्सचेंज MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स में 0.55 फीसदी की तगड़ी गिरावट देखी गई।
ये गिरावट कोई छोटी-मोटी नहीं, सीधे-सीधे 800 रुपये प्रति 10 ग्राम की थी। इसके बाद सोने का भाव 1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
अब सवाल ये कि आखिर ये सब हो क्यों रहा है? इसकी जड़ें इंटरनेशनल पॉलिटिक्स और इकोनॉमी में छिपी हैं।
मार्केट एनालिस्ट्स की मानें तो इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण काम कर रहे हैं। सबसे पहला और अहम कारण है अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव।
जब इन दोनों देशों के बीच टेंशन बढ़ती है, तो इसका असर सीधे क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। क्रूड महंगा होता है, तो दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल से लेकर हर चीज के दाम बढ़ते हैं, जिसे हम आम भाषा में इनफ्लेशन यानी महंगाई कहते हैं।
अब जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक, जिसे फेडरल रिजर्व कहते हैं, उसकी टेंशन बढ़ जाती है। महंगाई को काबू करने के लिए फेडरल रिजर्व अक्सर इंटरेस्ट रेट यानी ब्याज दरें बढ़ा देता है।
और यहीं से सोने के लिए मुश्किलें शुरू हो जाती हैं। आपको बता दें कि जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने में पैसा लगाने की बजाय बैंक या दूसरे ऐसे साधनों में पैसा लगाना पसंद करते हैं, जहां उन्हें ज्यादा रिटर्न मिल सके।
गोल्ड की चमक फीकी पड़ जाती है। इसके ठीक उलट, जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो सोने की मांग बढ़ती है और उसकी कीमत में भी उछाल आता है।
केसीएम ट्रेड के चीफ मार्केट एनालिस्ट टिम वाटरर ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया, "9 जुलाई को जो गोल्ड में तेजी दिखी थी, उसके बाद अब कंसॉलिडेशन देखने को मिल रहा है।
" कंसॉलिडेशन का मतलब है कि बाजार अभी एक दिशा तय नहीं कर पा रहा, कीमतें एक सीमित दायरे में घूम रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिससे ट्रेडर्स फिलहाल गोल्ड में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
टिम वाटरर ने एक अहम बात और कही। उनके मुताबिक, अगर क्रूड ऑयल की कीमतें अभी के लेवल पर टिकी रहती हैं, तो गोल्ड की कीमतों में थोड़ी गिरावट के बाद फिर से खरीदारी दिख सकती है।
लेकिन, अगर कच्चे तेल के दाम और ऊपर जाते हैं, तो इनफ्लेशन बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा। और जैसा कि हमने पहले ही बताया, बढ़ती महंगाई गोल्ड के लिए बिल्कुल अच्छी खबर नहीं होती।
फेडरल रिजर्व की चिंता और एचएसबीसी का नया अनुमान, क्या कहते हैं आंकड़े?
हाल ही में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की जून महीने की मीटिंग के मिनट्स जारी हुए हैं। इन मिनट्स से एक बात साफ हो गई है कि फेडरल रिजर्व अभी भी इनफ्लेशन के हाई लेवल को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित है।
इसका सीधा मतलब है कि अगर इनफ्लेशन पर काबू नहीं पाया गया, तो फेडरल रिजर्व कभी भी इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। और अगर ऐसा हुआ, तो सोने की कीमतों में और गिरावट आने की पूरी आशंका है।
इस बीच, बड़ी फाइनेंशियल कंपनी एचएसबीसी (HSBC) ने 9 जुलाई को एक बड़ा ऐलान किया। उसने साल 2026 और 2027 के लिए गोल्ड की कीमतों के अपने अनुमान को घटा दिया है।
एचएसबीसी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की 'आक्रामक' पॉलिसी और डॉलर में लगातार आ रही मजबूती की वजह से उन्होंने ये फैसला लिया है। साफ है कि बाजार के बड़े खिलाड़ी भी अब सोने को लेकर पहले जितने पॉजिटिव नहीं दिख रहे हैं।
एचएसबीसी के नए अनुमानों पर नजर डालें तो उन्होंने बताया है कि 2026 में गोल्ड की औसत कीमत 4,560 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। पहले उन्होंने इसके लिए 4,864 डॉलर प्रति औंस का अनुमान लगाया था, जो कि अब काफी कम हो गया है।
इसी तरह, साल 2027 के लिए एचएसबीसी ने गोल्ड की औसत कीमत 4,925 डॉलर प्रति औंस रहने की बात कही है, जबकि उनका पिछला अनुमान 5000 डॉलर का था।
तो कुल मिलाकर, यह साफ है कि गोल्ड मार्केट पर अभी कई दबाव हैं। भू-राजनीतिक टेंशन से लेकर केंद्रीय बैंकों की नीतियों तक, हर चीज सोने की चाल पर असर डाल रही है।
अगले कुछ महीनों के लिए एचएसबीसी का मानना है कि इस साल के बाकी महीनों में गोल्ड की कीमतें 3,800 डॉलर से 4,700 डॉलर प्रति औंस के बीच रह सकती हैं। और साल के अंत तक यह 4,750 डॉलर तक पहुंच सकती है।
अगले साल के अंत तक उनका अनुमान 5,025 डॉलर प्रति औंस का है।





































