दिल्ली: भारत और ब्रिटेन के रिश्ते अब सिर्फ क्रिकेट और इतिहास तक ही सीमित नहीं रहने वाले, बल्कि अब इनमें बिजनेस का एक नया फ्लेवर भी जुड़ने वाला है। एक ऐसी धमाकेदार डील होने जा रही है, जो दोनों देशों के बाजार में बड़े बदलाव लाएगी। जी हां, हम बात कर रहे हैं इंडिया-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की, जिसके लागू होने की तारीख पक्की हो गई है – 15 जुलाई। और इस खबर का सबसे बड़ा ट्विस्ट ये है कि ब्रिटेन से आने वाली महंगी गाड़ियों पर अब आपकी जेब थोड़ी कम ढीली होगी।
खबर ये है कि विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली कारों के लिए टैरिफ रेट कोटा का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। यानी, साफ-साफ कहूं तो अब यूके की गाड़ियां भारत में पहले से कहीं ज्यादा आसानी से और कम कीमत पर आ सकेंगी।
ये कोई छोटी-मोटी खबर नहीं है, बल्कि देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर और आयात-निर्यात के खेल को बदलने वाली एक बड़ी चाल है।
तो आखिर ये FTA क्या बला है और कारों पर क्या असर होगा?
सीएनबीसी-आवाज़ के इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण रॉय ने इस पूरे मामले को बड़े ही बारीकी से समझाया है। उन्होंने बताया कि 15 जुलाई से भारत और ब्रिटेन के बीच FTA लागू होने जा रहा है।
इसका सबसे सीधा फायदा ब्रिटेन से आने वाली गाड़ियों को मिलेगा। पहले साल में कुल 20,000 गाड़ियां कम ड्यूटी पर इंपोर्ट हो पाएंगी।
ये नंबर कोई छोटा-मोटा नहीं है, ये एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
अब जरा गाड़ियों की कैटेगरी और उन पर लगने वाली ड्यूटी का हिसाब भी समझ लीजिए। रॉय साहब के मुताबिक, जो गाड़ियां 3000cc से ऊपर की हैं (जिन्हें अब 2500cc+ माना जाएगा), उनमें से 10,000 गाड़ियां इंपोर्ट हो सकेंगी।
इन पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी 110% से सीधे घटकर 30% पर आ जाएगी। सोचिए, 110% और 30% में कितना बड़ा अंतर है!
अगर आपकी नजर 1500cc से 3000cc इंजन वाली गाड़ियों पर है, तो उनके लिए भी खुशखबरी है। ऐसी 5,000 गाड़ियां इंपोर्ट होंगी और इन पर ड्यूटी 66% से घटकर 50% हो जाएगी।
वहीं, 1500cc इंजन वाली 5,000 कारों पर 50% की ड्यूटी लगेगी। कुल मिलाकर, विदेशी गाड़ियों के शौकीनों के लिए यह एक जबरदस्त मौका है।
मगर ये छूट सिर्फ शुरुआती दौर की है। अगले पांच सालों तक इंपोर्ट कोटा बढ़ता रहेगा, लेकिन फिर 15 साल बाद ये धीरे-धीरे कम होगा।
लंबी अवधि की बात करें तो 15 साल बाद ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली कारों पर सिर्फ 10% कस्टम ड्यूटी लगेगी। इतना ही नहीं, पहले साल 2,500 कारें और कमर्शियल व्हीकल भी इंपोर्ट किए जाएंगे।
एक और अहम बात ये कि EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल), हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों पर कोटा छठवें साल से लागू होगा, यानी भविष्य की कारों को भी इसमें शामिल किया गया है।
भारत के एक्सपोर्टर्स के लिए क्या है खास?
FTA का फायदा सिर्फ ब्रिटेन से आने वाले सामान को ही नहीं मिलेगा, बल्कि भारत से यूके जाने वाले सामान के लिए भी ये किसी वरदान से कम नहीं है। लक्ष्मण रॉय ने बताया कि भारत से यूके को होने वाले 99% एक्सपोर्ट पर अलग-अलग चरणों में आगे चलकर कोई ड्यूटी नहीं लगेगी।
यानी, हमारे व्यापारियों के लिए यूके का बाजार और भी आसान हो जाएगा।
इस डील से हमारे कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स को बड़ी राहत मिलेगी। मिसाल के तौर पर, टेक्सटाइल और गारमेंट पर यूके में अभी 12% की ड्यूटी लगती है, वो अब जीरो हो जाएगी।
केमिकल्स पर 8% और बेस मेटल पर 10% की ड्यूटी भी अब खत्म हो जाएगी। ये उन उद्योगों के लिए बड़ी खबर है जो लंबे समय से ड्यूटी में राहत की मांग कर रहे थे।
और तो और, भारत से जाने वाले प्रोसेस्ड फ़ूड पर यूके में अभी 70% की भारी-भरकम ड्यूटी लगती है, जो अब जीरो होने जा रही है। मरीन प्रोडक्ट पर भी 20% की ड्यूटी खत्म हो जाएगी।
कुल मिलाकर, भारत के इन सारे सेक्टर्स को यूके के बाजार में अपने प्रोडक्ट बेचने में जबरदस्त फायदा मिलने वाला है। ये हमारे निर्यात के लिए एक नई उड़ान साबित हो सकती है।
और यूके से भारत आने वाले सामान पर क्या असर होगा?
अब बात यूके से भारत आने वाले सामान की। यहां भी कुछ खास आइटम्स पर ड्यूटी में बड़ी रियायत मिलेगी।
लक्ष्मण रॉय के अनुसार, यूके का 91% प्रोडक्ट पर भारत ड्यूटी में रियायत देगा। इनमें दो आइटम बहुत अहम हैं, जिनके दीवाने दुनिया भर में हैं।
पहला नाम है स्कॉच व्हिस्की का। अभी भारत में इस पर 150% की तगड़ी ड्यूटी लगती है।
इस FTA के बाद ये ड्यूटी किस्तों में घटकर सिर्फ 40% पर आ जाएगी। व्हिस्की के शौकीनों के लिए यह खबर किसी जश्न से कम नहीं है! दूसरा अहम आइटम है 'मेड इन इंग्लैंड' कारें, जिन पर अभी 100% की ड्यूटी लगती है।
FTA लागू होने के बाद ये ड्यूटी भी किस्तों में धीरे-धीरे कम होगी।
ये समझौता सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। यह दिखाता है कि कैसे दो बड़े व्यापारिक साझेदार एक-दूसरे के लिए बाजार खोलकर समृद्धि की नई राहें तैयार कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, 15 जुलाई के बाद भारत और ब्रिटेन के बाजार में आपको कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, खासकर विदेशी गाड़ियों और स्कॉच व्हिस्की के मामले में तो पक्का ही बदलाव दिखेगा।





































