मुंबई: शेयर बाजार की दुनिया में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, यानी अपनी प्यारी TCS, का नाम भला कौन नहीं जानता! देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी, जिसका डंका सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में बजता है। हाल ही में कंपनी ने अपने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी किए और इन नतीजों ने बाजार में रौनक ला दी। नतीजों के ठीक बाद, यानी 10 जुलाई को, TCS के शेयरों में गजब की उछाल देखने को मिली। दिनभर के कारोबार में शेयर करीब 4 प्रतिशत तक चढ़ गया और बीएसई पर 2132 रुपये का हाई टच कर गया।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कंपनी के शेयर एकदम से रॉकेट बन गए? दरअसल, निवेशकों का भरोसा कंपनी के दमदार नतीजों और उसके मैनेजमेंट की बातों पर बढ़ा है। कंपनी ने जिस तरह से अपनी परफॉरमेंस दिखाई है, उससे साफ संकेत मिले हैं कि आने वाली दूसरी तिमाही से मांग में धीरे-धीरे सुधार आएगा।
इसी वजह से बड़े-बड़े ब्रोकरेज हाउस भी TCS को लेकर अभी भी पॉजिटिव बने हुए हैं।
तो क्या रहे TCS के Q1 नतीजे, जो निवेशकों को भा गए?
अगर हम नतीजों की बात करें, तो TCS ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा, यानी सब कुछ जोड़-घटाकर जो असली प्रॉफिट निकला, वो पिछले साल के मुकाबले 4.61 प्रतिशत बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
ये आंकड़ा अपने आप में बताता है कि कंपनी ने कितनी मजबूत पकड़ बना रखी है।
सिर्फ मुनाफा ही नहीं, कंपनी का रेवेन्यू, यानी कुल कमाई भी जबरदस्त रही। सालाना आधार पर यह करीब 14 प्रतिशत बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये हो गई।
सोचिए, एक बड़ी कंपनी के लिए इतने बड़े स्केल पर इतनी अच्छी ग्रोथ दिखाना कोई छोटी बात नहीं है!
एक और अहम आंकड़ा है 'कॉन्स्टेंट करेंसी' रेवेन्यू ग्रोथ का। जून तिमाही के लिए, TCS ने पिछली तिमाही के मुकाबले 0.4% की यह ग्रोथ दर्ज की है।
इसका मतलब ये है कि करेंसी में उतार-चढ़ाव को अगर हटा दें, तब भी कंपनी की कमाई में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
AI से कितनी हुई कमाई, क्या यह भविष्य की दिशा है?
आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बोलबाला है और TCS भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। कंपनी ने AI से होने वाली कमाई में भी शानदार इजाफा दर्ज किया है।
तिमाही आधार पर यह 13.6% बढ़कर 2.6 अरब डॉलर पर पहुंच गई। अब तो कंपनी की कुल कमाई में AI का योगदान 8.5% हो चुका है।
ये दिखाता है कि TCS भविष्य की टेक्नोलॉजी पर कितना फोकस कर रही है और उसका फायदा भी उठा रही है।
हालांकि, एक छोटी सी बात पर ध्यान देना जरूरी है। TCS का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन अप्रैल-जून तिमाही में 24 प्रतिशत रहा, जबकि पिछली तिमाही में यह 25.3 प्रतिशत था।
इसमें मामूली गिरावट आई है, लेकिन ओवरऑल मजबूत प्रदर्शन के आगे यह बहुत बड़ा चिंता का विषय नहीं माना जा रहा है।
TCS के CEO और MD ने क्या कहा?
कंपनी के CEO और MD के. कृतिवासन ने इन नतीजों पर अपनी बात रखी है।
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में भू-राजनीतिक और मैक्रोइकोनॉमिक मोर्चे पर कई चुनौतियां हैं, फिर भी जून तिमाही में हमारी लगातार वृद्धि की रफ्तार और हमारी मजबूत रणनीतिक स्थिति साफ दिखती है। उनके इस बयान से निवेशकों को कंपनी की स्थिरता और भविष्य की योजनाओं पर और भरोसा मिला है।
सिर्फ इतना ही नहीं, तिमाही के दौरान TCS ने कुल 9.5 अरब डॉलर के नए सौदे हासिल किए। इतने बड़े सौदे बताता है कि ग्राहकों का कंपनी पर कितना विश्वास है।
साथ ही, कंपनी ने अपने AI इकोसिस्टम को और मजबूत करने के लिए Anthropic और Mistral जैसी कंपनियों के साथ अहम पार्टनरशिप भी की है।
अच्छी खबर कर्मचारियों के लिए भी है। जून तिमाही के दौरान TCS में 9,200 से ज्यादा नए लोग जुड़े।
इसके बाद 30 जून, 2026 तक कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 5,93,798 हो गई। यह दिखाता है कि कंपनी लगातार बढ़ रही है और रोजगार के मौके भी पैदा कर रही है।
तो क्या अब TCS के शेयर खरीदें, बेचें या होल्ड करके रखें?
जब भी किसी बड़ी कंपनी के नतीजे आते हैं, तो निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही आता है कि अब क्या करें? TCS के मामले में भी ऐसा ही है। आपको बता दें कि इस शेयर को कुल 51 एनालिस्ट कवर करते हैं।
इनमें से 33 एनालिस्ट ने स्टॉक पर 'बाय' (खरीदने) की रेटिंग दी है। वहीं, 12 ने 'होल्ड' (बनाए रखने) की सलाह दी है और सिर्फ 6 एनालिस्ट ने 'सेल' (बेचने) की रेटिंग दी है।
यानी, साफ-साफ दिख रहा है कि ज्यादातर एक्सपर्ट्स इस शेयर पर पॉजिटिव हैं।
तिमाही नतीजों के बाद, दुनिया के बड़े ब्रोकरेज हाउस JPMorgan ने TCS पर अपनी 'ओवरवेट' रेटिंग बरकरार रखी है। उन्होंने शेयर के लिए 2,400 रुपये प्रति शेयर का प्राइस टारगेट तय किया है।
JPMorgan का मानना है कि कंपनी के वित्तीय नतीजे उम्मीदों के मुताबिक ही रहे हैं। मैनेजमेंट को भी साल की दूसरी छमाही, यानी अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
हालांकि, JPMorgan का यह भी अनुमान है कि दूसरी तिमाही से 'कॉन्स्टेंट करेंसी' बेसिस पर रेवेन्यू सिर्फ 1% बढ़ने की संभावना है। फिर भी, ब्रोकरेज का कहना है कि वित्त वर्ष 2026 में मजबूत स्थिति के कारण TCS के लिए साल-दर-साल आधार पर 2.5% से 3% की 'कॉन्स्टेंट करेंसी' ग्रोथ हासिल करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं होगा।
उनका यह भी मानना है कि कम बेस के कारण TCS अपने कॉम्पिटीटर्स, जैसे इंफोसिस और HCLTech के बराबर प्रदर्शन कर सकती है। कुल मिलाकर, JPMorgan को इस स्टॉक में अभी भी वैल्यू नजर आती है।
मोतीलाल ओसवाल और मॉर्गन स्टेनली जैसे अन्य ब्रोकरेज हाउस भी कंपनी पर नजर बनाए हुए हैं और उनके भी अपने-अपने नजरिए हैं, लेकिन फिलहाल मार्केट का मूड TCS को लेकर पॉजिटिव ही बना हुआ है।




































