शिमला: हिमाचल प्रदेश में इस बार मॉनसून ने आते ही अपनी पूरी धमक दिखा दी है। ऐसा नहीं कि वो कोई नया मेहमान हो, हर साल आता है, लेकिन इस बार का मिजाज जरा हटकर है। आलम ये है कि राज्य में अब तक जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उससे 63 फीसदी ज्यादा बरस चुकी है। और तो और, अगले छह दिन तक भी मौसम से राहत मिलने के आसार बिल्कुल नहीं दिख रहे। मौसम विभाग ने तो अगले 48 घंटे के लिए बाकायदा ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी कर दिया है, जिसका सीधा मतलब है – सावधान! बड़ी बारिश होने वाली है।
मॉनसून की ये धमाकेदार एंट्री पहाड़ों के लिए कुछ परेशानियां भी लेकर आई है। सिर्फ बारिश ही नहीं, तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं का भी अलर्ट जारी है, खासकर ऊंचे पहाड़ी इलाकों में।
ऐसे में घरों से बाहर निकलने से पहले एक बार नहीं, सौ बार सोचने की ज़रूरत है, क्योंकि हिमाचल का मौसम पल भर में रंग बदलता है और जब वो अपना रौद्र रूप दिखाता है, तो रास्ते बंद होने से लेकर भूस्खलन तक की खबरें आम हो जाती हैं। प्रशासन भी मुस्तैद है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपनी और अपनों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें।
मौसम विभाग का चेतावनी भरा बुलेटिन: कहां-कहां होगी ज्यादा बारिश?
मौसम विभाग (IMD) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि अगले 48 घंटे हिमाचल के कई जिलों के लिए काफी अहम रहने वाले हैं। आज यानी 6 जुलाई को ऊना, कांगड़ा और सिरमौर जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है।
इसका मतलब है कि इन इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। वहीं, चंबा, मंडी और शिमला जैसे जिलों में ‘यलो अलर्ट’ दिया गया है, जो बताता है कि यहां भी तेज बारिश हो सकती है, लेकिन उसकी तीव्रता थोड़ी कम रहने का अनुमान है।
हालांकि, ‘यलो अलर्ट’ का ये मतलब कतई नहीं है कि खतरा टल गया है, बस थोड़ी सावधानी से काम चल सकता है।
कल यानी 7 जुलाई के लिए भी मौसम विभाग ने चेतावनी जारी रखी है। कांगड़ा, सोलन और सिरमौर जिले एक बार फिर ‘ऑरेंज अलर्ट’ की जद में रहेंगे।
इसके साथ ही चंबा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ‘यलो अलर्ट’ बरकरार रखा गया है। ये लगातार जारी अलर्ट संकेत दे रहा है कि लोगों को अभी और कुछ दिन तक बेहद सतर्क रहने की ज़रूरत है।
पहाड़ों पर भारी बारिश अक्सर नदी-नालों में उफान, सड़कों पर भूस्खलन और अचानक बाढ़ का कारण बन जाती है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोग और खासकर पर्यटक, जो इन दिनों हिमाचल की वादियों का लुत्फ उठाने आते हैं, उन्हें खास तौर पर सावधान रहना होगा।
11 जुलाई तक जारी रहेगा बारिश का सिलसिला
IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में बारिश का ये सिलसिला 11 जुलाई तक चलता रहेगा। यानी अगले छह दिन तक राज्य के ज्यादातर हिस्सों में तेज बारिश होने के आसार हैं।
8 और 9 जुलाई को भी प्रदेश के अधिकतर भागों में अच्छी-खासी बारिश होगी, जिससे मौसम में नमी बनी रहेगी और तापमान में भी गिरावट देखने को मिलेगी। ऐसे में उन किसानों के लिए राहत की खबर है, जिनकी फसलें अभी पानी का इंतजार कर रही थीं, लेकिन शहरी इलाकों और मैदानी क्षेत्रों के लिए यह जलभराव और यातायात में बाधा का सबब बन सकता है।
ऐसे मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और नदियों-नालों के करीब जाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि पहाड़ों में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा
सिर्फ बारिश ही नहीं, मौसम विभाग ने एक और अहम चेतावनी जारी की है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे ऊंचे और बर्फीले रेगिस्तान वाले इलाकों में 6 से 10 जुलाई तक तेज हवाएं चलने की संभावना है।
इन हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो काफी तेज होती है। ऐसी हवाएं खुले इलाकों में परेशानी खड़ी कर सकती हैं और साथ ही बिजली के खंभों या पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
इसके अलावा, राज्य के अन्य भागों में बिजली गिरने की घटनाओं का भी पूर्वानुमान है। पहाड़ों में बिजली गिरना एक आम बात है, लेकिन इसकी वजह से जान-माल का नुकसान भी हो सकता है।
इसलिए लोगों को तूफान और बिजली चमकने के दौरान खुले में रहने से बचना चाहिए और सुरक्षित जगहों पर पनाह लेनी चाहिए। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे समय में घर के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है।
तापमान का खेल: उछाल के बाद गिरावट
मौसम के इस पूरे मिजाज में तापमान भी अपना खेल दिखा रहा है। पिछले कुछ दिनों में हिमाचल के तापमान में कुछ अजीबोगरीब बदलाव देखे गए हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अगले चार दिनों के दौरान राज्य के तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे मौसम में थोड़ी ठंडक महसूस होगी।
हालांकि, इससे पहले बीते रविवार को ऊना को छोड़कर राज्य के बाकी सभी शहरों के तापमान में उछाल देखा गया था, जो थोड़ा चौंकाने वाला था। उदाहरण के तौर पर, सियोबाग का पारा 7.4 डिग्री बढ़कर 33.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
भुंतर में भी 6.2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई और पारा 35.2 डिग्री तक जा पहुंचा। राजधानी शिमला का तापमान भी 5.0 डिग्री के उछाल के साथ 27.5 डिग्री दर्ज किया गया था।
ये अचानक उछाल भरी गर्मी, शायद मॉनसून के आने से ठीक पहले की बेचैनी थी। अब जब मॉनसून अपनी पूरी ताकत के साथ बरस रहा है, तो उम्मीद है कि तापमान में गिरावट आकर लोगों को राहत मिलेगी।
लेकिन इन दिनों पहाड़ी यात्रा पर निकलने से पहले मौसम का हाल जानना और उसके हिसाब से तैयारी करना बेहद ज़रूरी है। पहाड़ों में भूस्खलन, रास्ते बंद होना और नदियों का उफान भरना, ऐसी बारिश में कोई नई बात नहीं है, इसलिए प्रशासन की सलाह को गंभीरता से लेना चाहिए।



































