बाजार डेस्क: आईपीओ बाजार में आजकल अलग ही धूम मची है! एक तरफ कंपनियों को पैसा चाहिए, दूसरी तरफ निवेशक नए मौके ढूंढ रहे हैं। ऐसे में जब कोई आईपीओ आता है, तो खूब चर्चा होती है। इसी गरमागरम माहौल में कोलकाता की कंपनी लेजर पावर एंड इंफ्रा का आईपीओ आया और आते ही इसने बाजार में हलचल मचा दी। 9 जुलाई को खुला ये इश्यू, निवेशकों के शानदार रिस्पॉन्स से फटाफट सब्सक्राइब हो गया है। अगर आप भी इसमें पैसे लगाने की सोच रहे हैं, तो जान लीजिए कि आपके पास अभी भी एक दिन का मौका है। जी हां, ये आईपीओ 13 जुलाई को बंद हो रहा है।
कंपनी का इरादा ₹742 करोड़ जुटाने का है और इस आईपीओ में ₹203 से ₹214 प्रति शेयर का प्राइस बैंड रखा गया है। अगर आप इसमें अप्लाई करना चाहते हैं, तो एक लॉट में 70 शेयर मिलेंगे।
तो फिर, क्या है इस कंपनी में ऐसा खास जो निवेशक इस पर टूट पड़े हैं? आइए, इस पर थोड़ी और रौशनी डालते हैं।
ग्रे मार्केट से क्या संकेत मिल रहे हैं?
अब बात आती है कि आईपीओ तो भर गया, लेकिन लिस्टिंग कैसी रहेगी? मार्केट में एक अनऑफिशियल जगह है, जिसे ग्रे मार्केट कहते हैं। ये एक तरह का कयास लगाने का प्लेटफॉर्म होता है, जहां लिस्टिंग से पहले शेयरों की खरीद-फरोख्त होती है।
यहां से अक्सर अच्छे संकेत मिल जाते हैं कि शेयर लिस्ट होते ही कैसा परफॉर्म करेगा। investorgain.
com के आंकड़े बता रहे हैं कि लेजर पावर एंड इंफ्रा के शेयर ग्रे मार्केट में अपने अपर प्राइस बैंड, यानी ₹214 से 16.36% के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। ये अपने आप में एक अच्छा संकेत है कि लिस्टिंग के दिन शेयर बाजार में एक अच्छी शुरुआत कर सकता है।
निवेशकों के लिए यह खबर किसी दिवाली बोनस से कम नहीं है, क्योंकि इसका सीधा मतलब है कि लिस्टिंग पर ही प्रॉफिट होने की उम्मीद बढ़ जाती है। हालांकि, यह सिर्फ एक अनुमान होता है, बाजार में कुछ भी पक्का नहीं होता।
कौन-कौन कर रहा निवेश, कितना है हिस्सा?
इस आईपीओ को अलग-अलग कैटेगरी के निवेशकों से कैसा रिस्पॉन्स मिला है, ये जानना भी ज़रूरी है। लेजर पावर एंड इंफ्रा का आईपीओ ₹542 करोड़ के 2.53 करोड़ नए शेयरों को जारी कर रहा है, वहीं मौजूदा निवेशक ₹200 करोड़ के 93 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) ला रहे हैं।
अब तक के सब्सक्रिप्शन डेटा पर नज़र डालें तो, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) का हिस्सा 0.68 गुना भर चुका है। ये वो बड़े निवेशक होते हैं, जैसे म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियां, जो बड़े दांव लगाते हैं।
वहीं, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए रिजर्व हिस्सा 2.03 गुना सब्सक्राइब हो गया है। इसमें हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और कॉरपोरेट्स जैसे निवेशक आते हैं।
रिटेल इनवेस्टर्स, यानी हम और आप जैसे छोटे निवेशकों का हिस्सा 0.85 गुना भरा है। अभी एक दिन बाकी है, तो उम्मीद है कि रिटेल हिस्सा भी आसानी से पूरा भर जाएगा।
कुल मिलाकर, सभी कैटेगरी में अच्छा रुझान दिख रहा है, जो आईपीओ की सफलता की कहानी कह रहा है।
आखिर यह कंपनी क्या काम करती है?
चलिए, अब ज़रा कंपनी के काम-धंधे पर भी एक नज़र डाल लेते हैं। लेजर पावर एंड इंफ्रा लिमिटेड कोलकाता की एक जानी-मानी कंपनी है।
ये कंपनी भारत के पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के लिए बड़े काम करती है। सोचिए, जब आपके घर में बिजली आती है, तो वह कितनी लंबी यात्रा करके आती है।
इस यात्रा को सुगम बनाने में कई तरह के उपकरण और केबल्स लगते हैं। लेजर पावर एंड इंफ्रा इन्हीं में से कुछ अहम चीजें बनाती है।
कंपनी पावर केबल, कंडक्टर और दूसरे स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट और कंपोनेंट बनाती है। इसके अलावा, ये कंपनी पावर डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) बेसिस पर भी काम करती है।
इसका मतलब है कि ये न सिर्फ सामान बनाती है, बल्कि प्रोजेक्ट्स को डिज़ाइन करने, सामान खरीदने और फिर उन्हें बनाने का काम भी करती है। कंपनी के प्रमोटर्स में दीपक गोयल, देवेश गोयल, अक्षत गोयल और राखी गोयल शामिल हैं, जो कंपनी को आगे बढ़ा रहे हैं।
साफ है कि कंपनी का काम बिजली के बुनियादी ढांचे से जुड़ा है, जिसकी मांग भारत में हमेशा बनी रहती है।
आईपीओ से जुटाए पैसे का कंपनी क्या करेगी?
किसी भी कंपनी के लिए आईपीओ लाने का एक बड़ा मकसद होता है, और वो है पैसा जुटाना। लेजर पावर एंड इंफ्रा भी यही कर रही है।
कंपनी अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयर जारी करके जो पैसा जुटाएगी, उसका इस्तेमाल कई ज़रूरी कामों के लिए करेगी। सबसे पहला और अहम काम है, कर्ज कम करना।
आज के दौर में कंपनियों के ऊपर कर्ज का बोझ होना एक आम बात है, लेकिन इसे कम करना हमेशा अच्छा माना जाता है। कर्ज कम होने से कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ बेहतर होती है और वह आगे चलकर और मज़बूती से काम कर पाती है।
इसके साथ ही, कंपनी इन पैसों का इस्तेमाल आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए भी करेगी। इसका मतलब है कि जो पैसा बचेगा, उसे कंपनी अपने रोज़मर्रा के कामों को बेहतर बनाने, नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करने या अपनी ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए इस्तेमाल कर सकती है।
कुल मिलाकर, यह कदम कंपनी के भविष्य को और उज्ज्वल बनाने की दिशा में उठाया गया है।
क्या इसमें निवेश करना फायदेमंद रहेगा?
अब आते हैं सबसे अहम सवाल पर, क्या इस आईपीओ में निवेश करना चाहिए? मास्टर कैपिटल के आईपीओ नोट में इस पर अपनी राय दी गई है। उनके एक्सपर्ट्स का मानना है कि "निवेशक इस आईपीओ को लंबे समय के निवेश के एक अच्छे मौके के तौर पर देख सकते हैं।
" उन्होंने यह भी कहा है कि पूर्वी भारत में पावर केबल और कंडक्टर बनाने की क्षमता के मामले में इस कंपनी का नाम दिग्गज कंपनियों में शामिल है। यानी, मार्केट में इसकी अपनी एक पहचान और दबदबा है।
यह एक बड़ा प्लस पॉइंट है जो निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।
हालांकि, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। मास्टर कैपिटल ने कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देने को कहा है, जो किसी भी निवेशक को पता होने चाहिए:
- कुछ ही ग्राहकों पर ज़्यादा निर्भरता: कंपनी के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा उसके टॉप 10 ग्राहकों से ही आता है। अगर इनमें से कोई ग्राहक हाथ से जाता है, तो कंपनी की कमाई पर असर पड़ सकता है। यह एक ऐसा चैलेंज है, जिस पर कंपनी को काम करना होगा।
- रेवेन्यू के बड़े हिस्से के लिए पावर केबल और कंडक्टर पर निर्भरता: कंपनी की ज़्यादातर कमाई पावर केबल और कंडक्टर से आती है। अगर इस सेक्टर में कोई मंदी आती है या नए विकल्प आते हैं, तो कंपनी के बिज़नेस पर प्रभाव पड़ सकता है।
- कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर: केबल और कंडक्टर बनाने में कई तरह के कच्चे माल लगते हैं। इनकी कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर डाल सकता है। यह एक ग्लोबल फैक्टर है, जिस पर कंपनी का सीधा कंट्रोल नहीं होता।
- लॉन्ग टर्म खरीद समझौतों के बिना सीमित सप्लायर बेस पर निर्भरता: कंपनी का सप्लायर बेस सीमित है और उसके पास लॉन्ग टर्म खरीद समझौते भी नहीं हैं। ऐसे में अगर सप्लायर्स से कोई दिक्कत आती है, तो प्रोडक्शन पर असर पड़ सकता है।
इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, 13 जुलाई को इस आईपीओ में पैसे लगाने का आखिरी मौका है। तो अगर आप निवेश का मन बना रहे हैं, तो इन सभी फैक्ट्स और एक्सपर्ट्स की राय को ज़रूर कंसीडर करें और अपनी रिसर्च भी कर लें।
बाजार में सोच-समझकर ही कदम उठाना हमेशा बेहतर होता है।






































