नई दिल्ली: आजकल जिसे देखो, वो अपनी मोटी सैलरी का बड़ा हिस्सा या तो SIP में डाल रहा है, या फिर सीधे शेयर बाजार में दांव खेल रहा है। सबकी सोच एक ही है – पैसा लगाए रखो, कंपाउंडिंग का जादू चलेगा और एक दिन बढ़िया रिटर्न मिलेगा। लेकिन अगर हम आपको बताएं कि एक ऐसा प्रोफेशनल भी है, जो सालाना 50 लाख रुपए कमाता है और उसने इस भीड़ से बिल्कुल अलग रास्ता चुना है, तो? जी हां, उसने म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, इन सब पारंपरिक तरीकों से हटकर कुछ ऐसा किया, जिस पर अब सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। लोग समझ नहीं पा रहे कि उसका यह फैसला जीनियस है या सिर्फ एक बड़ी रिस्क!
मामला एक ऐसे दोस्त का है जिसकी कहानी X (पहले ट्विटर) पर राम नाम के एक यूजर ने शेयर की। राम ने बताया कि उनके दोस्त का सालाना पैकेज 50 लाख रुपए का है।
इस पैकेज में से 25 लाख रुपए उसे सीधे सैलरी के तौर पर मिलते हैं, और बाकी के 25 लाख रुपए कंपनी के शेयर यानी RSU (Restricted Stock Units) के रूप में दिए जाते हैं। ये शेयर सीधे नहीं मिलते, बल्कि चार सालों में धीरे-धीरे 'वेस्ट' होते हैं।
मतलब, कंपनी चार साल में किस्तों में ये शेयर उसे देती है।
अब अमूमन होता ये है कि जब किसी की इतनी मोटी कमाई होती है, तो वो बचे हुए पैसे को कहीं न कहीं निवेश करता है। कोई इंडेक्स फंड में जाता है, कोई मल्टीकैप में, तो कोई सीधे ब्लूचिप स्टॉक्स उठा लेता है।
लेकिन राम के दोस्त ने 'आम जिंदगी' को छोड़कर 'मेंन्टोस जिंदगी' चुनी! उसने अतिरिक्त पैसे को स्टॉक मार्केट या म्यूचुअल फंड में लगाने के बजाय, अपना खुद का बिज़नेस खड़ा करने का फैसला किया।
बिज़नेस का भूत कैसे चढ़ा?
बता दें कि इस प्रोफेशनल ने पिछले साल ही अपना पहला बिज़नेस शुरू किया। ये बिज़नेस बैग्स बनाने और बेचने का था।
और कमाल की बात ये है कि वो यहीं नहीं रुका। इस साल उसने पुरुषों के कपड़ों का बिज़नेस भी लॉन्च कर दिया।
यानी एक साथ दो-दो बिज़नेस चला रहा है, अपनी नौकरी के साथ। सोचिए, एक तरफ 50 लाख की नौकरी, ऊपर से दो बिज़नेस की जिम्मेदारी।
सुनने में ही थकान हो जाए, है ना?
ऐसा नहीं है कि वो पूरी तरह से पारंपरिक निवेश से दूर है। उसने पीपीएफ (PPF) में तो पैसा लगा रखा है।
साथ ही, वो हर साल करीब 1.2 लाख रुपए का LIC प्रीमियम भी भरता है। तो इसका मतलब ये हुआ कि कुछ सुरक्षा तो उसने बना रखी है।
लेकिन उसका सबसे बड़ा फोकस, उसका सबसे ज्यादा पैसा और उसकी सबसे ज्यादा एनर्जी अपने इन नए बिज़नेस को आगे बढ़ाने पर लगी हुई है।
SIP का कंपाउंडिंग vs बिज़नेस का रिस्क: क्या दांव सही है?
राम ने अपनी पोस्ट में यही सबसे बड़ा सवाल उठाया, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। उन्होंने पूछा, 'क्या मेरा दोस्त शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में मिलने वाले लंबे समय के कंपाउंडिंग रिटर्न से चूक रहा है?' या फिर 'क्या अपना सफल बिज़नेस खड़ा करना भविष्य में उसे इससे भी बड़ा फायदा दे सकता है?' बस, ये सवाल क्या था, पब्लिक ने अपने-अपने ज्ञान के पिटारे खोल दिए।
कई यूजर्स का मानना था कि निवेश और बिज़नेस, दोनों के बीच संतुलन बनाकर चलना ही सबसे अच्छा तरीका है। उनका कहना था कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव तो लगा ही रहता है, वो 'मार्केट रिस्क' के अधीन है।
जबकि अपने बिज़नेस में फैसलों पर खुद का नियंत्रण होता है। अगर आपका बिज़नेस सफल हो जाता है, तो रिटर्न की कोई लिमिट नहीं है, जो कि SIP या शेयर बाजार में अक्सर देखने को नहीं मिलती।
वहां मार्केट की चाल पर निर्भर रहना पड़ता है।
वहीं कुछ लोगों ने इस प्रोफेशनल का पूरा सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी को अपने बिज़नेस आइडिया और उसकी संभावनाओं पर पूरा भरोसा है, तो अपने काम में निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है।
उनका तर्क था कि जब कोई व्यक्ति खुद अपने कारोबार को संभालता है, तो उसके पास बेहतर फैसले लेने और मुनाफा बढ़ाने का कहीं ज्यादा मौका होता है। एक सफल बिज़नेस जो रिटर्न दे सकता है, उसकी तुलना शेयर बाजार के रिटर्न से नहीं की जा सकती।
उन्होंने ये भी कहा कि शेयर बाजार में आप सिर्फ एक 'पैसिव इन्वेस्टर' होते हैं। आप बाजार की लहरों पर सवार होते हैं, कभी ऊपर तो कभी नीचे।
लेकिन अपने बिज़नेस में आप 'एक्टिव क्रिएटर' होते हैं। आप खुद अपनी किस्मत लिखते हैं, नए प्रोडक्ट्स लाते हैं, मार्केटिंग करते हैं और सीधे कस्टमर्स से जुड़ते हैं।
यहां ग्रोथ की संभावनाएं असीमित हो सकती हैं, बशर्ते आपमें रिस्क लेने की हिम्मत और मेहनत करने का जज्बा हो।
हालांकि, SIP और म्यूचुअल फंड के वफादार भी कम नहीं थे। उनका कहना था कि बिज़नेस शुरू करना और उसे सफल बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं है।
इसमें बहुत ज्यादा समय, मेहनत और सबसे बढ़कर, असफल होने का एक बड़ा रिस्क होता है। SIP और म्यूचुअल फंड में एक 'डाइवर्सिफिकेशन' का फायदा मिलता है, आपका पैसा अलग-अलग कंपनियों में बंटा होता है, जिससे रिस्क कम होता है।
इसके अलावा, ये 'पैसिव इनकम' का स्रोत है, जिसमें आपको रोज़-रोज़ सिर खपाने की जरूरत नहीं पड़ती।
कुल मिलाकर, इस बहस का कोई एक सीधा जवाब नहीं है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं।
एक तरफ शेयर बाजार की कंपाउंडिंग ताकत है, जो लंबे समय में करोड़पति बना सकती है, लेकिन बाजार के उतार-चढ़ाव के साथ। दूसरी तरफ अपना बिज़नेस है, जिसमें रिस्क तो बहुत है, लेकिन अगर चल गया तो रिटर्न की कोई सीमा नहीं है और आप खुद अपने बॉस होते हैं।
आखिर में, यह सब उस व्यक्ति की अपनी जोखिम लेने की क्षमता, उसके बिज़नेस आइडिया पर विश्वास और उसकी मेहनत पर निर्भर करता है। इस प्रोफेशनल ने जो रास्ता चुना है, वो कई लोगों के लिए एक नया 'पर्स्पेक्टिव' दे रहा है कि पैसे को सिर्फ एक ही तरह से नहीं, बल्कि अलग-अलग तरीकों से भी बढ़ाया जा सकता है।





































