पटना: जैसे ही आसमान में काले बादल घिरते हैं और धरती पर बारिश की बूंदें पड़ने लगती हैं, एक डर भी लोगों के मन में घर करने लगता है. खासकर ग्रामीण इलाकों में. ये डर है सांपों का. बरसात का मौसम आते ही सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं और इंसानों से उनका सामना बढ़ जाता है. सोचिए, अचानक खेत में काम करते हुए या घर के आंगन में चलते हुए किसी को सांप काट ले, तो उस पल क्या होता होगा? दिल की धड़कन बढ़ जाती है, दिमाग सुन्न पड़ जाता है. और इसी घबराहट में अक्सर लोग वो गलतियां कर बैठते हैं, जो उनकी जान पर भारी पड़ सकती हैं.
अगर कभी आपके या आपके किसी जानने वाले के साथ ऐसा हो जाए, तो सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि दुनिया में ज़्यादातर सांप ज़हरीले नहीं होते. पानी में रहने वाले कई सांप भी बिना ज़हर के होते हैं.
लेकिन क्या हम हर सांप को पहचान सकते हैं? क्या हमें पता चल पाएगा कि जिसने काटा है, वो ज़हरीला है या नहीं? नहीं न! इसलिए, किसी भी सूरत में इसे हल्के में लेने की भूल बिल्कुल मत कीजिएगा. एक्सपर्ट्स साफ़ कहते हैं कि ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट लेना ही सबसे समझदारी भरा और सेफ उपाय है.
अगर सही समय पर इलाज मिल जाए, तो बड़े से बड़े ख़तरे को भी टाला जा सकता है.
बारिश में सांप बाहर क्यों निकल आते हैं?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये बारिश आते ही सांपों का निकलना क्यों बढ़ जाता है? दरअसल, बरसात के दौरान सांपों के बिलों में पानी भर जाता है. बेचारे सांपों को भी तो सूखी और सुरक्षित जगह चाहिए होती है.
ऐसे में वो अपने घरों से बाहर निकलकर ऐसी जगहें तलाशते हैं, जहां उन्हें पनाह मिल सके. और अक्सर ये सुरक्षित जगहें हमारे घर, खेत, खलिहान या पशुशालाएं होती हैं.
बस, यहीं से शुरू हो जाती है इंसानों और सांपों के बीच की अनचाही मुलाकातें, और बढ़ जाते हैं स्नेकबाइट के मामले.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि देश के हर कोने से आने वाली वो खबरें हैं, जो हमें आगाह करती हैं कि हमें सावधानी बरतनी चाहिए. खासकर उन लोगों को जो गाँवों या खेतों के आसपास रहते हैं.
उनके लिए यह जानकारी सोने पर सुहागा से कम नहीं है.
क्या सभी सांप जहरीले होते हैं?
जैसा कि हमने पहले भी बताया, एक्सपर्ट्स की मानें तो ज़्यादातर सांप ज़हरीले नहीं होते. बहुत सारे सांप तो ऐसे होते हैं जो अपने बचाव में काट तो लेते हैं, लेकिन उनके काटने से जान का ख़तरा नहीं होता.
पानी में रहने वाले सांपों की भी यही कहानी है – उनमें से भी कई ज़हरीले नहीं होते. लेकिन एक सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि आम इंसान ये पहचान नहीं पाता कि काटने वाला सांप ज़हरीला था या नहीं.
क्या आप किसी सांप के सिर्फ रंग या चाल देखकर बता सकते हैं कि उसका ज़हर कितना ख़तरनाक है? नहीं न! यही वजह है कि अगर कभी किसी को सांप काट ले और आपको पक्का पता न हो कि वो ज़हरीला था या नहीं, तो किसी भी तरह की लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है. इस मामले में 'रिस्क है तो इस्क है' वाला डायलॉग बिल्कुल नहीं चलता.
यहां तो 'रिस्क है तो तुरंत डॉक्टर है' वाला फंडा काम आता है.
सांप काटने पर सबसे पहले क्या करें?
तो अब सवाल आता है कि अगर कभी सांप काट ले, तो सबसे पहले क्या किया जाए? सबसे ज़रूरी बात, जिस व्यक्ति को सांप ने काटा है, उसे किसी भी हालत में घबराने न दिया जाए. सोचिए, जब कोई ऐसी डरावनी चीज़ हो जाए, तो इंसान का दिल कितनी तेज़ी से धड़कने लगता है.
ये घबराहट ही तो पूरे शरीर में खून के दौरे को तेज़ कर देती है. और अगर ज़हर है, तो यही तेज़ दौड़ता खून ज़हर को और तेज़ी से पूरे शरीर में फैला सकता है.
इसलिए, उसे आराम से एक जगह लिटा दें और उसे शांत रखने की कोशिश करें. उसे बिना वजह चलने-फिरने से बचाएं, क्योंकि हर एक मूवमेंट ज़हर को फैलने का मौका दे सकती है.
जितना ज़्यादा व्यक्ति शांत रहेगा, उसके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन उतना ही धीमा होगा, जिससे ज़हर फैलने की रफ़्तार भी कम हो सकती है.
कौन सी गलतियां जान पर भारी पड़ सकती हैं?
अक्सर गाँवों में या पुरानी फिल्मों में आपने देखा होगा कि सांप काटने वाली जगह पर लोग ब्लेड से चीरा लगा देते हैं या किसी कपड़े, रस्सी या तार से कसकर बांध देते हैं. एक्सपर्ट्स साफ़ शब्दों में चेताते हैं कि ये दोनों ही चीज़ें बेहद ख़तरनाक और नुकसानदायक साबित हो सकती हैं.
सांप काटने वाली जगह पर चीरा लगाने से क्या होगा? इससे घाव गहरा हो सकता है, इन्फेक्शन फैल सकता है और कई बार तो इससे ज़हर फैलने की बजाय शरीर के दूसरे हिस्सों को ही नुकसान पहुँचने लगता है. इसी तरह, उस जगह को रस्सी या तार से कसकर बांधने से खून का दौरा रुक जाता है, जिससे उस अंग में गैंग्रीन या दूसरी गंभीर कॉम्प्लीकेशन्स होने का रिस्क बढ़ जाता है.
याद रखिए, ऐसी कोई भी कोशिश जान बचाने की बजाय और मुसीबत बढ़ा सकती है.
फिर आखिर करना क्या चाहिए?
सीधा, सरल और सबसे कारगर उपाय यह है कि बिना एक पल की भी देरी किए, उस व्यक्ति को तुरंत पास के किसी सरकारी अस्पताल या हेल्थ सेंटर ले जाया जाए. सांप काटने के मामलों में ‘समय’ ही सबसे बड़ा फैक्टर होता है.
जितनी जल्दी मरीज़ को डॉक्टर के पास पहुँचाया जाएगा, उतनी ही ज़्यादा संभावना है कि उसकी जान बच जाएगी. आजकल सरकारी अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन आसानी से उपलब्ध होते हैं.
यह इंजेक्शन ही असली इलाज है जो ज़हर के असर को ख़त्म करता है.
कुछ लोग आज भी झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू नुस्खों के चक्कर में पड़कर अपना और मरीज़ का कीमती समय बर्बाद कर देते हैं. ये अंधविश्वास जानलेवा साबित हो सकता है.
साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है और डॉक्टरों के पास सांप के ज़हर का काट मौजूद है, तो ऐसे में पुरानी दकियानूसी बातों पर विश्वास करना मूर्खता होगी. हॉस्पिटल में सही समय पर एंटी-स्नेक वेनम से ट्रीटमेंट मिलने पर ज़्यादातर मरीज़ पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं.
इसलिए, अगर कभी ऐसी नौबत आ जाए, तो अपनी अक्ल का इस्तेमाल करें और सीधे डॉक्टर के पास पहुँचें.
कुल मिलाकर, स्नेकबाइट की कंडीशन में सही जानकारी, सूझबूझ और बिना देरी किया गया इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है. छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर साबित हो सकती है और कई बार तो जान भी जा सकती है.
इसलिए, ऐसी किसी भी सिचुएशन में डॉक्टर की सलाह और हॉस्पिटल के ट्रीटमेंट को ही अपनाएं. आपकी जान आपके लिए सबसे क़ीमती है!




































