पटियाला: पंजाब के पटियाला शहर में आज सुबह से ही बिजली विभाग के दफ्तर के बाहर एक अजीबोगरीब और तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। दरअसल, अपनी नौकरी पक्की कराने की मांग को लेकर पावरकॉम के आउटसोर्स मीटर रीडर कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। आज सुबह करीब 10 कर्मचारी एक बड़ी पानी की टंकी पर चढ़ गए, जबकि उनके सैकड़ों साथी नीचे मुख्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। यह प्रदर्शन अपनी मांगों को मनवाने के लिए कर्मचारियों की हताशा और दृढ़ संकल्प को दिखा रहा है।
पिछले करीब 10 दिनों से ये आउटसोर्स कर्मचारी पटियाला स्थित पावरकॉम मुख्यालय के बाहर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि आउटसोर्सिंग की व्यवस्था खत्म कर उन्हें विभाग में नियमित किया जाए।
सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के बाद, कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को तेज करने का फैसला किया और विरोध के इस जोखिम भरे तरीके को अपनाया। पानी की टंकी पर चढ़े इन कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, वे नीचे नहीं उतरेंगे।
आउटसोर्सिंग नीति और सरकारी वादों की हकीकत
यह पूरा मामला पंजाब में आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा है, जो लंबे समय से अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। यूनियन नेताओं के मुताबिक, पंजाब सरकार ने पहले यह आश्वासन दिया था कि राज्य में आउटसोर्स व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।
सरकार ने उस समय यह भी संकेत दिया था कि लगभग 65 हजार कर्मचारियों को, जो इस आउटसोर्सिंग मॉडल के तहत काम कर रहे हैं, उन्हें विभाग में शामिल कर स्थायी कर्मचारी बनाया जाएगा। यह खबर उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की एक किरण लेकर आई थी, जो सालों से न्यूनतम वेतन, बिना किसी सामाजिक सुरक्षा और नौकरी की गारंटी के काम कर रहे थे।
इन कर्मचारियों को लगा था कि अब उनके दिन फिरने वाले हैं और उन्हें भी सरकारी कर्मचारियों जैसे अधिकार और सम्मान मिलेगा।
हालांकि, सरकार के इन वादों के बावजूद, जमीन पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। घोषणा के महीनों बाद भी, आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में कोई खास प्रगति नहीं दिख रही है।
मीटर रीडरों जैसे आउटसोर्स कर्मचारी आज भी उसी ठेकेदारी प्रथा के तहत काम करने को मजबूर हैं, जहां उनकी नौकरी की सुरक्षा एक ठेकेदार के हाथ में होती है और उन्हें स्थायी कर्मचारियों की तुलना में काफी कम सुविधाएं मिलती हैं। इसी वजह से इन कर्मचारियों में सरकार के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।
बेअसर बैठकें और बढ़ती नाराजगी
पटियाला में पावरकॉम मुख्यालय के बाहर पिछले 10 दिनों से जारी इस धरने के दौरान, कर्मचारी नेताओं ने कई बार सरकार और विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की है। उनकी एकमात्र मांग आउटसोर्स व्यवस्था को खत्म कर सभी संबंधित कर्मचारियों को विभाग में शामिल कर नियमित करना है।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार ने इस मुद्दे पर कई बार बैठकें बुलाने का आश्वासन दिया, लेकिन हर बार इन बैठकों को या तो टाल दिया गया या आखिरी वक्त पर रद्द कर दिया गया। सरकार के इस टालमटोल भरे रवैये ने कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा ली है।
धरने पर बैठे एक यूनियन नेता ने मीडिया से बात करते हुए अपनी हताशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, "जब सरकार बार-बार हमारी बात सुनने से इनकार कर रही है, तो हमारे पास ऐसे कड़े कदम उठाने के अलावा और क्या रास्ता बचता है? हम अपना भविष्य दांव पर लगाकर बैठे हैं, और सरकार सिर्फ आश्वासन पर आश्वासन दिए जा रही है।
अब हमें साफ दिख रहा है कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक हमें हमारा हक नहीं मिल जाता।
यह सिर्फ हमारी रोजी-रोटी का सवाल नहीं, बल्कि हमारे सम्मान का सवाल है।"
पानी की टंकी से उग्र हुआ प्रदर्शन
सरकार की ओर से कोई सकारात्मक फैसला न लिए जाने और लगातार टालमटोल के बाद, कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया। इसी रणनीति के तहत आज सुबह 10 कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पटियाला स्थित पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन किया।
उनका यह कदम सिर्फ सरकार का ध्यान खींचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी एकजुटता और संकल्प को दिखाने के लिए भी था। नीचे सैकड़ों साथी नारेबाजी कर रहे हैं और पानी की टंकी पर चढ़े अपने साथियों को समर्थन दे रहे हैं।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ राज्य सरकार पर भी दबाव बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस बढ़े हुए विरोध प्रदर्शन पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
क्या वह इन कर्मचारियों की मांगों को सुनेगी और वादे पूरे करेगी, या फिर स्थिति और तनावपूर्ण होगी? फिलहाल, पटियाला में यह गतिरोध जारी है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई समझौता हो पाता है या नहीं। यह घटना आउटसोर्स कर्मचारियों के उन अनगिनत संघर्षों की एक बानगी है, जो देश भर में स्थायी नौकरी और सम्मानजनक जीवन के लिए जूझ रहे हैं।


