एटा: उत्तर प्रदेश के एटा जिले के मारहरा थाना क्षेत्र का भुरगवा गांव। शनिवार देर शाम का वक्त था, गांव में भागवत कथा का पावन आयोजन चल रहा था। भक्ति और शांति के इस माहौल में अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे माहौल में कड़वाहट घोल दी। कथा के बीच नाम की छाप लगवाने के मामूली से विवाद ने ऐसा तूल पकड़ा कि देखते ही देखते पंडाल में ही मारपीट शुरू हो गई। एक किशोरी और उसकी भाभी को इस हरकत का विरोध करना भारी पड़ गया, उन्हें सरेआम पीटा गया। यह घटना बताती है कि कैसे छोटी सी बात भी कभी-कभी बड़े बवाल का कारण बन जाती है, खासकर जब लोगों का धैर्य जवाब दे जाए और धार्मिक आयोजनों की मर्यादा भूल जाएं।
भागवत कथा, जिसे अक्सर भक्ति और शांति का प्रतीक माना जाता है, वहां इस तरह की घटना होना अपने आप में एक चौंकाने वाली खबर है। जानकारी के मुताबिक, गांव में भागवत कथा का आयोजन बड़े धूमधाम से किया गया था।
गांव के लोग बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा ले रहे थे। शाम का वक्त था, कथा अपने पूरे शबाब पर थी।
इसी दौरान गांव की एक किशोरी अपनी भाभी के साथ कथा सुनने पहुंची थी। सब कुछ सामान्य चल रहा था, भक्तिमय माहौल था।
लेकिन एक युवक की हरकत ने पूरे सीन को पलट दिया।
भागवत कथा में नाम की "छाप"; फिर बवाल
मामला तब गरमाया, जब जोगेश नाम का एक युवक, जो चरण सिंह का बेटा बताया जा रहा है, अचानक हरकत में आया। उसने कथावाचक शास्त्री जी से किशोरी और उसकी भाभी के नाम की छाप लगवा दी।
अब ये 'नाम की छाप' क्या होती है, इसे थोड़ा समझना ज़रूरी है। कई बार धार्मिक आयोजनों में या किसी विशिष्ट मुहूर्त पर, लोग अपने नाम की छाप या विशिष्ट चिह्न लगवाते हैं, जिसे शुभ माना जाता है।
लेकिन इसमें सहमति बेहद ज़रूरी होती है। यहाँ दिक्कत ये हुई कि जोगेश ने बिना किशोरी और उसकी भाभी की अनुमति के उनके नाम की छाप लगवा दी।
सोचिए, किसी पवित्र धार्मिक आयोजन में, जहाँ आप शांति से बैठे हों, और कोई आपकी बिना मर्ज़ी के आपके साथ ऐसा कुछ करे, तो कैसा लगेगा? जाहिर है, दोनों महिलाओं को ये बात नागवार गुज़री। उन्होंने फौरन इस हरकत का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि यह ठीक नहीं है और उन्हें ऐसा नहीं करवाना था। उनका विरोध करना स्वाभाविक था, लेकिन जोगेश और उसके परिवार को यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगी।
विरोध से उपजा विवाद और मारपीट
जो विरोध एक सामान्य बात पर शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे गाली-गलौज और तीखी बहस में बदल गया। जोगेश और उसके परिवार के लोग, जिनमें मनोज, सचिन और प्रेमपाल भी शामिल थे, भड़क गए।
वे किशोरी और उसकी भाभी को खुलेआम गालियां देने लगे। मामला इतना बढ़ा कि बात सिर्फ जुबानी जंग तक नहीं रुकी।
आरोप है कि जोगेश और उसके साथी किशोरी और उसकी भाभी पर टूट पड़े और उन्हें पीटना शुरू कर दिया। भागवत कथा के पंडाल में, जहाँ लोग भक्ति में लीन थे, वहीं इस तरह की मारपीट का होना बेहद शर्मनाक था।
जब किशोरी और उसकी भाभी को पीटा जा रहा था, तो उन्हें बचाने के लिए किशोरी का भाई और उसकी मां भी बीच-बचाव करने आए। लेकिन हमलावरों ने उन्हें भी नहीं बख्शा।
उन्हें भी पीटा गया। इस पूरी घटना में कुल तीन लोग घायल हो गए।
सोचिए, एक धार्मिक आयोजन में इतनी हिंसा, वह भी एक छोटी सी बात पर। गांव के लोग भी इस घटना से सन्न रह गए होंगे।
यह घटना बताती है कि कैसे कुछ लोग धार्मिक आयोजनों की गरिमा को तार-तार कर देते हैं।
पुलिस में शिकायत और मेडिकल जांच
मारपीट की इस घटना के बाद, घायल अवस्था में पीड़ित परिवार मारहरा कोतवाली पहुंचा। उन्होंने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई और एक लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए फौरन कार्रवाई की। शिकायत मिलने के बाद, घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया गया, ताकि चोटों की पुष्टि हो सके और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
मेडिकल परीक्षण से यह सुनिश्चित हो जाता है कि पीड़ितों को चोटें आई हैं, जो आगे चलकर केस में अहम सबूत बनती हैं।
पुलिस ने पूरी छानबीन के बाद, पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है। जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें जोगेश, मनोज, सचिन और प्रेमपाल के नाम शामिल हैं।
इन चारों को इस मारपीट की घटना में नामजद किया गया है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज किया है और अब आगे की जांच शुरू कर दी है।
थाना प्रभारी का बयान और आगे की जांच
इस पूरे मामले पर मारहरा थाने के प्रभारी के.के.
लोधी ने मीडिया से बात की। उन्होंने पुष्टि की कि यह मारपीट का मामला है।
थाना प्रभारी ने बताया, "शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच जारी है।" इसका मतलब है कि पुलिस अब इस मामले की तह तक जाएगी, आरोपियों से पूछताछ करेगी और सबूत जुटाएगी।
कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी होगा, उसे सजा मिलेगी।
ऐसी घटनाएं समाज में एक संदेश छोड़ जाती हैं। धार्मिक आयोजनों में शांति और सौहार्द बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है।
किसी भी विवाद को बातचीत से सुलझाया जा सकता है, न कि हिंसा से। एटा की यह घटना एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि कैसे छोटे से विवाद भी अनियंत्रित होकर गंभीर रूप ले सकते हैं।
पुलिस की जांच अब यह तय करेगी कि दोषियों को कितनी और कैसी सजा मिलती है। घटना के बाद से गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग हैरान हैं कि इतनी पवित्र जगह पर ऐसा कैसे हो गया।
पुलिस अब जल्द से जल्द इस मामले में अगली कार्रवाई करने की बात कह रही है।


