प्रयागराज: यूपी की सियासी बिसात पर इस समय हर चाल बड़ी दिलचस्प दिख रही है। यहां कब कौन, किधर और क्यों चला जाए, कहना मुश्किल है। लेकिन अब एक ऐसा नाम राजनीति के अखाड़े में उतर गया है, जिसने खाकी वर्दी में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। हम बात कर रहे हैं पूर्व IPS अधिकारी प्रेम प्रकाश की, जो एक वक्त उत्तर प्रदेश के एडीजी रह चुके हैं। ये वही प्रेम प्रकाश हैं, जिनका नाम मुख्तार अंसारी को रोपड़ जेल से बांदा जेल तक सुरक्षित लाने वाले ऑपरेशन से भी जुड़ा है। अब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन छोड़कर, नौजवान नेता चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ले ली है। उनका यह कदम यूपी की राजनीति में नई हलचल पैदा कर गया है।
प्रेम प्रकाश ने सोमवार शाम करीब 6 बजे प्रयागराज में चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी में अपनी नई सियासी पारी का ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने साफ तौर पर बताया कि आखिर क्यों उन्होंने बीजेपी को 'टाटा बाय-बाय' कहा और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) को अपना नया ठिकाना चुना।
उनकी बातों से साफ था कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी सोच और कुछ पुराने अनुभवों की दास्तान छुपी है।
बीजेपी क्यों छोड़ी और आजाद समाज पार्टी क्यों चुनी?
दैनिक भास्कर से बातचीत में प्रेम प्रकाश ने इस सियासी बदलाव की पूरी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की विचारधारा, बहुजन समाज के हितों के लिए उसकी लड़ाई और वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के लिए किए जा रहे कार्यों से वे काफी प्रभावित हुए हैं।
उनका कहना था कि चंद्रशेखर आजाद जिस तरह से गरीब, शोषित और बहुजन समाज के लोगों की मदद के लिए लगातार काम कर रहे हैं, वह काबिले तारीफ है।
प्रेम प्रकाश ने उत्तराखंड के टिहरी मामले का जिक्र करते हुए चंद्रशेखर आजाद की सक्रियता की तारीफ की। उन्होंने बताया कि टिहरी में पीड़ित परिवार से मिलना, उनकी मदद करना, उनकी बातें सुनना और फिर उनकी आवाज को लोकसभा तक पहुंचाना — ये सारी बातें उन्हें चंद्रशेखर आजाद से जोड़ती हैं।
वे कांशीराम जी के विचारों और बहुजनवाद को लोगों तक पहुंचाने का जो काम कर रहे हैं, उसी मार्ग पर प्रेम प्रकाश भी चलना चाहते हैं।
अब सवाल उठता है कि बीजेपी क्यों छोड़ी? इस पर प्रेम प्रकाश ने बेबाकी से जवाब दिया कि बीजेपी छोड़ने की कोई निजी वजह नहीं थी। उन्होंने बताया कि वे लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी से जुड़े थे, लेकिन उन्हें पार्टी में कोई खास जिम्मेदारी या सक्रिय भूमिका नहीं मिली।
न तो किसी कार्यकारिणी में उन्हें जगह मिली और न ही कोई संगठित कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर। एक तरह से, उन्हें बीजेपी में रहते हुए अपनी क्षमता का इस्तेमाल करने का मौका नहीं मिल रहा था।
उन्होंने ये भी बताया कि बसपा में शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन मायावती की पार्टी में अधिकारियों को अक्सर अवसर नहीं मिलते, इसलिए वहां बात नहीं बन पाई।
मुख्तार अंसारी केस और एनकाउंटर का रिकॉर्ड
प्रेम प्रकाश का नाम उनकी पुलिस सेवा के दौरान एक 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के तौर पर भी जाना जाता था। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पूरे कार्यकाल में एक भी फर्जी एनकाउंटर का आरोप नहीं लगा।
यह बात अपने आप में उनकी ईमानदार कार्यशैली का प्रमाण है।
इसके अलावा, उन्होंने मुख्तार अंसारी को रोपड़ जेल से उत्तर प्रदेश की बांदा जेल लाने के उस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन का भी जिक्र किया, जब वे इस पूरे अभियान का हिस्सा थे। उन्होंने बताया, "लोग कह रहे थे कि गाड़ी पलट जाएगी, ये हो जाएगा, वो हो जाएगा.
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" उस वक्त ऐसी आशंकाएं और अफवाहें तेज थीं कि मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला हो सकता है या उसकी गाड़ी पलट सकती है। लेकिन प्रेम प्रकाश ने जोर देकर कहा कि इस पूरी कार्रवाई को "संवैधानिक तरीके से" अंजाम दिया गया और मुख्तार को पूरी सुरक्षा के साथ बांदा जेल पहुंचाया गया।
यह उनकी सेवा का एक बड़ा और अहम अध्याय है, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।
2027 विधानसभा चुनाव पर नजर और प्राथमिकताएं
सियासी मैदान में उतरने के साथ ही प्रेम प्रकाश ने अपनी भविष्य की योजनाओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जाहिर की।
उन्होंने बताया कि चुनाव के लिए उनकी पूरी तैयारी रहेगी, क्योंकि आजाद समाज पार्टी ने पहले से ही कई विधानसभा सीटों पर अपनी तैयारी शुरू कर रखी है। प्रेम प्रकाश ने कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ उसे निभाएंगे।
हालांकि, अभी तक उनकी सीट तय नहीं हुई है, लेकिन पार्टी पदाधिकारी जो तय करेंगे, उसी के अनुसार वे आगे बढ़ेंगे।
जब उनसे उनकी चुनावी प्राथमिकताओं के बारे में पूछा गया, तो प्रेम प्रकाश ने साफ किया कि उनका मानना है कि देश में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सभी को बराबरी से मिलना चाहिए। उनका लक्ष्य इसी आदर्श को जमीनी स्तर पर उतारना होगा।
इस तरह, एक कड़क IPS अधिकारी अब जनसेवा के एक नए अध्याय की शुरुआत करने को तैयार है, और देखना होगा कि यह सियासी सफर उन्हें कहां तक ले जाता है।


