महराजगंज: उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में अवैध शराब का कारोबार करने वालों के लिए खतरे की घंटी बज गई है। पुलिस ने ऐसा डंडा चलाया है कि अब तक जो लोग चुपचाप इस गोरखधंधे में शामिल थे, उनकी नींद हराम हो गई है। जिले में लंबे समय से अवैध शराब के खिलाफ एक जबरदस्त अभियान चल रहा है। इसी कड़ी में, बुधवार को महराजगंज की परसामलिक पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया, जहां लगभग एक हज़ार लीटर अवैध शराब को जमीन में दफन कर दिया गया, मतलब पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। ये वो शराब थी जो न सिर्फ कानून तोड़कर बनाई जा रही थी, बल्कि लोगों की सेहत के लिए भी जहर का काम कर रही थी।
परसामलिक थाने पर हुई बड़ी कार्रवाई
ये पूरी कार्रवाई कोई छोटी-मोटी बात नहीं थी, बल्कि पुलिस अधीक्षक महराजगंज शक्ति मोहन अवस्थी के सीधे निर्देशों पर हुई। उनका मकसद साफ था - जिले में बढ़ते अपराध और अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम लगाना।
इसी मकसद से, अपर पुलिस अधीक्षक की देखरेख में और क्षेत्राधिकारी नौतनवा के दिशानिर्देशन में यह अभियान चलाया गया। परसामलिक थाने के परिसर में पुलिस ने वो 929 लीटर अवैध शराब नष्ट की, जो पिछले 100 आबकारी मुकदमों से जुड़ी थी।
सोचिए, 100 मामले! इसका मतलब है कि इतने लोगों पर कानून का शिकंजा कसा जा चुका था, और अब उनकी अवैध कमाई का जरिया भी खत्म कर दिया गया।
कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता
अक्सर ऐसी कार्रवाइयों पर सवाल उठते हैं, लेकिन महराजगंज पुलिस ने यहां पूरी पारदर्शिता बरती। ये शराब यूं ही नहीं उठाई और फेंक दी गई।
इसके लिए बाकायदा माननीय न्यायालय सिविल जज (प्रवर खंड) त्वरित न्यायालय/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, महराजगंज से आदेश लिया गया था। यानी, हर कदम कानून के दायरे में रहकर उठाया गया।
जब शराब को नष्ट किया जा रहा था, तब सिर्फ पुलिस वाले ही मौजूद नहीं थे। राजस्व विभाग के अधिकारी और आबकारी विभाग के बड़े बाबू भी मौके पर डटे थे।
सबने मिलकर सुनिश्चित किया कि तय नियमों के हिसाब से ही काम हो।
इतना ही नहीं, पूरी प्रक्रिया का पंचनामा तैयार किया गया। यह एक कानूनी दस्तावेज होता है जिसमें सब कुछ लिखा जाता है कि क्या हुआ, कैसे हुआ और कौन-कौन मौजूद था।
साथ ही, पूरे मामले की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी करवाई गई। आज के डिजिटल दौर में ये बेहद जरूरी है, ताकि हर एक चरण का पुख्ता सबूत रहे और कोई बाद में उंगली न उठा सके।
इस तरह की पूरी तैयारी दिखाती है कि प्रशासन इस मामले में कितना गंभीर है और कैसे भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई करने को तैयार है।
अवैध शराब क्यों है इतना बड़ा खतरा?
अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ 929 लीटर शराब ही तो है, इतनी बड़ी बात क्या है? दरअसल, अवैध शराब का कारोबार सिर्फ राजस्व का नुकसान नहीं करता, बल्कि यह सीधे-सीधे लोगों की जिंदगी से खेलता है। इस तरह की शराब अक्सर मानकों के हिसाब से नहीं बनाई जाती।
इसमें खतरनाक रसायन और मेथनॉल जैसी चीजें मिला दी जाती हैं, जो पीने वाले के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। कई बार ऐसी शराब पीने से लोगों की आंखें चली जाती हैं, किडनी फेल हो जाती है या फिर मौत तक हो जाती है।
इसके अलावा, यह कारोबार समाज में अपराध को भी बढ़ावा देता है। जो लोग इस धंधे में लिप्त होते हैं, वे अक्सर दूसरे गैरकानूनी कामों में भी शामिल पाए जाते हैं।
इससे इलाके में शांति भंग होती है और कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौतियां खड़ी होती हैं। महराजगंज पुलिस का यह अभियान सिर्फ शराब नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिले में एक साफ-सुथरा और सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि उनका यह अभियान सिर्फ एक दिन के लिए नहीं है, बल्कि लगातार जारी रहेगा।
भविष्य की रणनीति और जनता से अपील
महराजगंज पुलिस ने अपनी मंशा बिल्कुल साफ कर दी है। उन्होंने कहा है कि अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ उनका अभियान एक लंबी लड़ाई है, जिसे वे पूरी ताकत से लड़ेंगे।
जो भी इस गोरखधंधे में शामिल मिलेगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। इसका सीधा संदेश है कि अवैध शराब का धंधा करने वाले या तो सुधर जाएं या फिर कानूनी अंजाम भुगतने को तैयार रहें।
पुलिस ने सिर्फ अपनी कार्रवाई पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि आम जनता से भी मदद की अपील की है। उन्होंने कहा है कि अगर किसी को भी अपने आस-पास अवैध शराब के निर्माण या बिक्री की कोई सूचना मिलती है, तो वे तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दें।
पुलिस ने आश्वस्त किया है कि ऐसी हर सूचना पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी और सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। यह एक सामुदायिक प्रयास है, जिसमें पुलिस और जनता दोनों को मिलकर काम करना होगा, तभी महराजगंज को अवैध शराब के कारोबार से पूरी तरह मुक्त किया जा सकेगा और लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की सही मायने में रक्षा हो पाएगी।
यह कार्रवाई इस बात का एक और सबूत है कि प्रशासन अवैध गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहा है और आगे भी इसी सख्ती के साथ काम करता रहेगा।


